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दुःख झेले हैं मैंने भी बहुत भले छोटी बच्ची हूँ

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दुःख झेले हैं मैंने भी बहुत भले छोटी बच्ची हूँ  तुमने झेला तो कौन सा तीर मार दिया बताओ,, ग़रीबी क्या होती है कभी गरीबों के घर जाओ   भाषण देते राशन देते, ग़रीब बनके मुस्कुराओ,, मेहनत से मज़दूरी करके घर का खर्च चलाओ  अकल ठिकाने लग जाएगी मुस्कुरा के बताओ,, पढ़े लिखे कमा लेते, अनपढ़ बन कर कमाओ नमक रोटी से गुज़ारा करके, हँस के बतलाओ,, तनख्वाह देते मालिक कभी नौकर बन जाओ  नौकर बनके तनख्वाह ले घर का खर्च उठाओ,, ग़लती तुम्हारी माफ़ी लायक गरीबों को सताते  ग़रीब को लूट तुम खाते, भाषण देने चले आते,, सरकारी खज़ाना तुम लुटाते गुनेहगार ठहराते  एक ग़लती भी हो जाए तो सज़ा सुनाके जाते,, जनता को गुमराह करते, समाज़ को लूट खाते  कोई ग़लती हो भी जाए माफ़ी माँग जीत जाते #NYAY #Anyay #Garibi #Brojgari

कैद किया मुज़रिम को आज रिहा कर दिया

कैद किया मुज़रिम को आज रिहा कर दिया  अच्छा किया जीने का हक़ सबको तूने दिया,,  इन्सान को उसकी औक़ात दिखला हीं दिया  कल तक जिसने जो किया आज भुला दिया,, मौका दिया सुधरने का समय है सुधर जाओ  क़हर ढाने वाले डर जाओ वक्त है घर जाओ,, कोरोना तूने जो किया, सभी को सुधार दिया  लालच बुरी बला, आँखों देखि दिखला दिया,, हज़ारो लाखों रोज़ाना मरते, ग़रीब पैसे वाले   गुनहगारों को ठीक, बेगुनाहों को सजा दिया,, वैज्ञानिकों ने प्रयास कर, वैक्सीन बना लिया  महामारी को फ़ैलाने, वालो को अपना लिया,,  अदृश्य ने असलियत आँखों देखी बता दिया  आत्मनिर्भर का मतलब जजों को बता दिया,, विदेशी जजों ने कैदी को जेल से रिहा किया आजाद कर देश में न्याय का हीं काम किया  #NYAY #Anyay #Bhrashtachar #atyachar

थोड़ा वक्त गुज़रने को वक्त को गुज़ारने दो

थोड़ा वक्त गुज़रने को, वक्त को गुज़ारने दो  धीरज रखो सब ठीक ही होगा ग़र तुम होगे,, यहाँ बिकता सबकुछ रुपयों से, धीरज रखो  रुपयों को आने के लिये, वक्त तो गुज़रने दो,, रोजगार भले ना हो, खेत खलिहान तो होगा ख़ेती बारी करने को जनसख्याँ घट जाने दो,, ग़ुलामी मत करना यारो, ग़ुलाम बन जाओगे  ग़ुलामी करवाने के लिये वक्त को गुज़ारने दो,, अकेले कब तक लड़ोगे सभी दुश्मन के जैसे  दुश्मन के संग दोस्ती को वक्त को गुज़रने दो,, झुकना मत सब याद रखना जो गयें अपने थे  अपनों की याद में, वक्त को हीं गुज़र जाने दो,, छोड़ना मत भ्र्ष्टाचारियों को, अत्याचार करेंगे  भविष्य के सुधार में वर्तमान को बिगाड़ने दो,, बदला नहीं बदलाव जरूरी, ग़र सुधरना चाहे  बदलाव के लिये बदला ग़र बिगड़ता हीं जाये,, बर्वाद कितनों का करेगा, तुम अकेले तो नहीं  जनता को जागरूक करो वक्त गुज़र जाने दो,, फ़िर से आयेगा, वोट मांगने को, वक्त आने दो  वोट देना हीं मत फ़िर से एलेक्शन तो आने दो #NYAY #Anyay #Bhrashtachar #poor

चोरी करने वालो को पुलिस पकड़ लेती

चोरी करने वालो को पुलिस पकड़ लेती है,चाहे पेट भरने के  लिए खाना हीं क्यूँ ना चुराया हो,गर्व की बात है हमारे रक्षक  होते पुलिस वाले,मुज़रिम को थाने में ले जाते,रिमांड लेने के  बाद रिकवरी फ़िर उन्हें जेल में पहुँचाते, सबुत इकट्ठा कर के रिपोर्ट तैयार करते जज के फैसले का इंतज़ार कर सज़ा भी करवाते या सबूत के आभाव में बरी. बहुत लम्बी चौड़ी कहानी होती मुज़रिमों की,क्यूँकि मुज़रिम  तो अपने बाप का भी नहीं होता, पुलिस वाले अच्छे होते जो  मुज़रिम को जेल में पहुँचाते उससे सज़ा कटवाते,पुलिस को  मुज़रिम को पकड़ने के बदले तनख्वाह,सरकार और पुलिस का होना अति आवश्यक है देश को चलाने के लिए, सरकार  को हम वोट देते और जिताते रहते. दिन पर दीन घोटाले होते तो ऍफ़ आई आर भी होते हीं रहते    देश छोड़कर भाग जाते मुज़रिम तो कभी पकड़े भी जाते तो  किसी का एनकाउंटर होता तो किसी का गुनाह साबित नहीं  हो पाता, ऐसा क्यूँ जब पुलिस का काम है पकड़ना तो कोई  गुनाह करके कैसे पुलिस को गुमराह कर जाता, मुज़रिम को  पकड़ना क्या इतना मुश्किल है.    सरकार से गलतियाँ नहीं होती, क्या पुलिस काम ईमानदारी  से करते हैं, क्या जज सभी मुज़रिमों को सज़ा दे पाता, न

जिंदगी मौत के सफ़र में सिर्फ तू बना भगवान

पलटकर देख तू ख़ुदको हरतरफ़ तेरा हीं नाम  कोरोना हुआ बदनाम सब देने लगे तुझे ईनाम,, जिंदगी मौत के सफ़र में सिर्फ तू बना भगवान  थोड़े पैसो के लालच में, बेचने लगा धर्म ईमान,, बेबस औ लाचार से नफ़रत करता होगा जरूर  ऐय्यासी करता होगा तभी तो उसे बनाया हुज़ूर,,  ख़ुदको तो बेच दिया अब देश बेचने की है बारी  मंदबुद्धि का शिकार है तू ,चाहे ख़ूब कर तैयारी,, आतंकवादी तो नहीं शायद है मुसीबत का जड़  समझदार हीं होगा शायद, बता कोरोना का डर,,   जो तूने बनाया है, एकदिन आयेगा तू भी डरेगा हज़ारो लाखों को मारने वाला तू एकदिन मरेगा,, नेगेटिव रिपोर्ट बता के बता क्यूँ तू पैसा कमाता  महामारी को फ़ैलाने वाला रिपोर्ट ख़ुदसे बनाता,, भर्ष्टाचार में लीन बता अत्याचार क्यूँ करने लगा  मरीज़ को हीं लूटने लगा, ख़ुदसे क्यूँ लड़ने लगा,, फ़ोन ट्रेसिंग होगा तेरा, राज़ सारे खुल हीं जायेंगे  पकड़े जायेंगे सारे गुनेहगार, तुझे देख पछतायेंगे  #doctor #fakereport #coronavirus

दफ़नायेंगे हमें बिच बाज़ार में लाश गिरायेंगे

दफ़नायेंगे हमें बिच बाज़ार में लाश गिरायेंगे  ख़रीद फ़रोख़्त लूटखोरी करते नज़र आयेंगे,, अरबों का सौदा करते, फूटी कौड़ी, दे पायेंगे   दफ़नायेंगे, हर एक को जिन्दा दफ़ना जायेंगे,, पैरो तले ज़मीन, खिसकायेंगे, दफ़ना आयेंगे  क़ब्र ख़ोद, हम सबको दफ़नाते नज़र आयेंगे,, पैसो का बुख़ार चढ़ा, ऐसे कैसे उतार, जायेंगे  ग़रीबी, भुखमरी बीमारी, बेरोजगारी, बढ़ायेंगे,, यक़ीन नहीं होता, जल्द हीं, दिन दिखलायेंगे  कोरोना मरीज़ बढ़ायेंगे, जिन्दा हीं दफ़नायेंगे,, प्रभु राम का गुण गायेंगे, रावण, नज़र जायेंगे  पैरो तले ज़मीन खिसका, तुम्हे दफ़ना आयेंगे,, रावण युग, स्थापना कर, औरतों को सतायेंगे महँगाई, बढ़ायेंगे, भ्र्ष्टाचार से, ग़रीबी बढ़ायेंगे,, सोने की चिड़िया, लगता पत्थर का बनवायेंगे  उम्र घटाने की दवा खोज़, भगवान बनजायेंगे,, न्याय नहीं अन्याय करवायेंगे सज़ा कटवायेंगे  जिद्दी, जो नहीं माने उसे जिन्दा हीं दफ़नायेंगे,, समुन्दर मंथन, कर अमृत भी निकाल, लायेंगे ढकोसला कर चुनाव जितने के बाद, रुलायेंगे,, लोकतान्त्रिक, तरीके से राजतंत्र, फ़िर, लायेंगे  ग़ुलामी, करवायेंगे, अत्याचार, कर, दफ़नायेंगे #Bhrashtachar #atyachar #Rajniti #Crime #poetry #corona #

विकास कहाँ जायेगा कोई नया आयेगा

विकास कहाँ जायेगा कोई नया आयेगा एक को ख़त्म करोगे कोई दूजा लायेगा,, जैसा होता आया ऐसा होता रह जायेगा  समाज कोई बदल न पायेगा पछतायेगा,, गुट बनाके सब तहस नहस कर जायेगा  पस्चताप करने के बाद ये समझ पायेगा,, चूतिया बना झाल बजाता घर तू जायेगा पुलिस हो या गुण्डा भ्र्ष्टाचार कर पायेगा,, अत्याचार से सरकार के साथ हो जायेगा  ग़ुलामी करवा तुझसे भ्र्ष्टाचार करवायेगा,, जेल में ठूँस के तुझसे चक्की पिसवायेगा  अफ़सोस करता तू घर को वापस आयेगा,, आज चुप रह जायेगा कल तू पछतायेगा  भ्र्ष्टाचार ख़त्म करो नारा काम न आयेगा,, जिंदगी भर ग़ुलामी करता बोझ उठायेगा  पढ़ लिखकर अनपढ़ बन पिछड़ जायेगा,, आवाज़ उठायेगा तो कानून समझपायेगा  सच्चा नागरीक बन देश में एकता लायेगा,, संविधान का बदलाव जरुरी यही मज़बूरी  कोरोना ख़त्म होने तक, राहत देना जरुरी #NYAY #Anyay #Crime #Poor #Bharshtachar #Atyachar #corona

राजनीती पार्टियों में भर्ष्टाचार से अत्याचार

राजनीती पार्टियों में भर्ष्टाचार से अत्याचार यही रोजग़ार बेरोजगारों की मज़बूरी करने लगे मज़दूरी छूटा घर द्वार,, ग़रीब है लाचार मज़दूर बीमार जहाँ देखो वहाँ अत्याचार  हर तरफ़ लूटखोरी का बाज़ार ना जाने किसकी सरकार,, यह कहना उचीत कहलायेगा क्यूँकि समाज मज़बूर होता ऐसे लोगो से डरता जो उन्हें नुकसान पहुँचा सकते हैं, डर के वज़ह से कानून के पास जाता बताता अपनी तकलीफ़ ज्यादातर को न्याय मिलता ख़ुश हो जाता लेकिन समाज़ को क्या सिखाता यहीं कि मैं ईमानदार हूँ. ईमानदार कोई नहीं शायद ऐसा इसलिए क्यूँकि अनपढ़ से काम करवाते या उनका इस्तेमाल कर ऐय्यासी की जिंदगी बिताते गरीबों को उनके मेहनत से कम पैसा देकर बताओ कैसे ईमानदार बन जाते पढ़ लिखकर पैसा जितना कमाते बताओ उसमें ग़रीब का क्या दोष जो मज़बूरी करे मज़दूरी अपने परिवार का पेट भरने के लिये और अनपढ़ बन कर  रह जाता पिछड़ जाता समाज से हमेशा के लिए. मरता क्या नहीं करता मारता या मरता जैसी नौबत क्यूँकि अत्याचार सह नहीं पाता भर्ष्टाचार करने जाता जब महसूस करता कि यही एक रास्ता अपने बच्चों के भविष्य सुधारने का ग़रीबी मिटाने का तो अत्याचार में लीन हो मुज़रिम बन जाता,ग

मकड़ी के जाल में फँसता चला गया

मकड़ी के जाल में  फँसता चला गया निकलना चाहता था  निकला नहीं,, फँसता चला और  फँसाता चला गया  जो हुआ उसके साथ  बदला लिया,, धोखा का बदला  धोखे से दिया लिया  बदला लिया  हिम्मत वाला था बहुत,, ख़ुद के बिछायें जाल में  ख़ुद फँस गया  फँसाना चाहता था  जो वो ख़ुद फँसा,, अजीबोग़रीब घटना  जिन्दगी का खेला  बच के जो निकला  वो देखेगा मेला,, सवाल बहुत मग़र  जवाब कौन दे पाया  जवाब देने जो गया वो  सवाल बन गया #gyan #Ghatna #dhokha #badla

साँप के बिल में हाथ डालोगे तो साँप तो डसेगा

साँप के बिल में हाथ डालोगे तो साँप तो डसेगा दूध तुमहीनें तो पिलाया ज़हर तो उगलेगा हीं,, सभी साँप एक जैसे नहीं हैं, साँपो के उसूल होते सिर्फ उसी को डसते जो उसे मारने को जाते,, ज़हरीला साँप के पास क्यूँ जाते उगल देगा ज़हर कहीं तुम भी तो साँप नहीं जो ढाते हो क़हर,, साँप की लड़ाई कोई तो देखेगा गवाह बनजायेगा साँप को सज़ा देने के लिये कोई तो आयेगा,, साँपो का रक्षक या भक्षक कहलायेगा बतलायेगा ज्ञान दे जायेगा अपने जैसा तुम्हे भी बनाएगा,, भरष्टाचार करने वाला इन्सान अत्याचार तो करेगा अत्याचार करने वाला साँप हीं तो कहलायेगा,, भरष्टाचार अत्याचार बलात्कार क्यूँ होता बतलाओ जब नहीं बता सकते उल्टा सीधा मत पढाओं,, ज्ञानी बनो अज्ञानी नहीं तब जाके ज्ञान सिखलाओ नहीं सीखा सकते ज्ञान तो क़हर क्यों ढाते रहते,, महामारी का ख़तरा जब टला नहीं क्यूँ भटक जाते साँप के बिल में हाथ डाल साँप तुम नज़र आते,, ईतना आसान है क्या सबको एकसाथ लेके चलना जब सबके साथ नहीं चल सकते क्यूँ क़हर ढाते,, भगवान तो नहीं एक इन्सान हो, साँप क्यूँ बन जाते आपस में लड़ते रहते, महामारी को नहीं भगाते,, अनपढ़ गँवार को क्यूँ लाते भरष्टाच

दिहाड़ी के बदले देह ब्यापार

दिहाड़ी के बदले देह ब्यापार चित्रकूट में है नर्क का द्वार,, पेट भरने की मज़बूरी मज़दूरी खूब पनप रहा देह कारोबार ,, नाम नहीं बतायेंगे मारे जायेंगे डर से सबकुछ सम्भव यार,, प्रशासन का साथ होगा जरूर तभी संभव देह का ब्यापार,, भष्टाचार फ़िर करते अत्याचार क्या इसलिए चुना है सरकार ,, मज़दूरों को मकान किराये पर पेट भरने के लिए दो दिहाड़ी ,, सबकुछ संभव औरत होने पर बिना औरत कैसा धन्धा यार,,

पिते भी हो पिलाते भी हो शराब हीं तो है

पिते भी हो पिलाते भी हो शराब हीं तो है  कोई अमृत तो नहीं जो पैसा लुटाते हो,, ग़म तो भुल ही जाते थकान मिट जाने से  अच्छी नींद भी आती होगी भुलाने से,, अच्छा करते हो तनावमुक्त होके सो जाते  या भटकते लड़खड़ाते कहीं चले जाते,, तुम्हारे जैसे जितने भी होंगे ख़ुश बहुत होंगे वाह क्या बात है मैं तो सिर्फ़ अमृत पिता,, घंटो लाइन में लगते मेहनत करते तब जाके  कहीं नंबर आता ख़रीद के खुश हो जाते,, मेहनत की कमाई का थोड़ा हिस्सा हीं तो है  बदले में अनगिनत खुशियाँ ख़ुश हो पाते,, फ़ायदा तो हुआ अबतक नुकसान भी होता  नशे में चूर अपने रिश्ते नाते भुला जाते,, कभी तो ऐसा होता अपनों को हीं बेच जाते  माँ,बाप,बहन,भाई,बीवी,बच्चो को रुलाते,,  या फ़िर खुशियों के जाने से ग़म को आने से  शराब को अमृत समझ पीते और पिलाते,,  पैसा ना होने से ऐसे लोगो के संपर्क में आते  जो भरस्टाचार अत्याचार से पैसा कमाते,, नशा कर हत्या,लूट,अपहरण,चोरी,बलात्कार  जैसे अपराध को अंजाम या साथ दे जाते,, अच्छा करते समाज में भरस्टाचार अत्याचार  करवाते ख़ुद भी करते पैसा कमाते लुटाते,, आने वाले पीढ़ी के भविष्य को भी खत्म कर मुस्कुराते अफ़सोस करते पीते और पिलाते,, स

लुटाते तुम सरकारी खज़ाना

लुटाते तुम सरकारी खज़ाना राजा जैसी जिंदगी बिताते,, लाखों कड़ोड़ो खर्चा तुम्हारा सुऱक्षा के नाम पैसा लुटाते,, पार्टी तुम्हारी प्लानिंग तुम्हारी ख़ुद नियम बनाते रहते तुम,, फुट डाल राजनिति अपना के बेरोजगारों को लूट के खाते,, ग़रीबी भुखमरी फ़िर लालच दे  दिहाड़ी मज़दूर बनाते जाते,, प्रशासन को नियम में उलझाते न्यूज़ चैनल को निति बताते,, बातें लुभावनी करके लालच दे जनता को भी लूट के खाते,, ख़ुद के बनाये नियम में उलझते जनता को भी उलझाते जाते,, अचानक से आते फैसला सुनाते मुसीबत कम नहीं और बढ़ाते,, एक्सपर्ट भी कैसे जो राय बताते अपनी बातों में खुद उलझ जाते

प्रशासन ख़ुद न्याय करने में सक्षम

मौज़ूदा हालात को मद्देनज़र देखते हुए यह कहना बिलकुल उचित कहलाएगा की प्रशासन ख़ुद ही न्याय करने में सक्षम हो चुकी है. प्रशासन मुज़रिमों को कोर्ट में क्यूँ ले जाती , जब ख़ुद सज़ा देने में सक्षम है तो जज के समक्ष पेश करना अपमान करने के बराबर है , ऐसा इसलिए हो रहा क्यूँकि जज को प्रशासन पे ज्यादा भरोशा है. जज को सोंचना चाहिए की इससे कानून ब्यवस्था पे अनेकों ऐसे सवाल उठ रहे है, जो कानून ब्यवस्था को अँधा साबित करने के लिये काफ़ी हैं , कानून सिर्फ अमीर लोगों राजनीती पार्टी से ताल्लुक़ात रखने वालो के लिये है. हर तरफ़ आपराधिक गतिविधियाँ हैं चाहे किसी भी कार्य क्षेत्र में चले जाओ, ज्यादातर लोग भरस्टाचार में लीन नज़र आएंगे,उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत मिलेगा हीं नहीं और मिल भी जाये तो उनपे कार्यवाई नहीं होगी. कानून ब्यवस्था में सुधार जरुरी है, शुरुआत भरस्टाचार में लीन प्रशासन को कड़ी से कड़ी सज़ा  दें, राजनीती पार्टी को भी सज़ा देना जरुरी है, जो भरस्टाचार में लीन होके जनता के साथ अत्याचार कर पाने में सक्षम हो पा रहें, ज़्यादातर ऐसे मामले हैं जिसमें प्रशासन का नाम बदनाम हो रहा, उन्हें भी भरस्टाचार में लीन हो

यही तो विकास है

कहाँ दीखता विकास है  जो तेरे आस पास है  यही तो विकास है,, ना जाने विकास में कितनो का साथ है  विकास अकेला नहीं कितनो के साथ है,, भरस्टाचार है अत्याचार है सबूत है  देश की तरक्की उसी के नाम से है,, विकास तो विकास है  चाहे किसी का भी हो  देश का हीं तो विकास है,, उसके साथियों ने हीं तो सहारा लिया  एकदूसरे की मदद कर अपना विकास किया,,  शक्तिशाली विकास है  पुरे सिस्टम को हिला के रख दिया  ना जाने ऐसा किसके कहने पे किया  जो भी किया विकास किया,, देश को लूट के खाने वाले  ना जाने और कितने विकास है  जनता पे अत्याचार में ना जाने कितनो हाथ है  दिख रहा सबको खुली किताब की तरह विकास है  यही है भरस्टाचार अत्याचार की निशानी जो विकास है 

कोरोना महामारी का सब को ख़बर

उसके आने से क्या से क्या हो गया  आनन फ़ानन में रायता फ़ैल गया,, सहम गये सब अरे ये क्या हो गया  एक वायरस ने हमला बोल दिया,, ताली थाली बजाय दीपक जलाया  बेअसर मेहनत पे पानी फिऱ गया,, लॉकडाउन से सब तहस नहस हुआ  मरीज़ दिन पर दिन बढ़ते चले गये,, जो हाल जब था आज भी वही हाल  गरीबों की बीमारी अमीरों पे भारी,, जड़ी बूटी दवा दारू सब हुए बेअसर  कोरोना महामारी का सब को ख़बर,, ना जाने कौन सा अब देव दूत आएगा  कोरोना के साथ दुष्टो को ले जायेगा,, हँस ले बेटा जब अपना टाइम आएगा  छटपटाता माफ़ी माँगता रह जायेगा,, थोड़ा तुम भी मुस्कुरा लो गुनगुना लो  क्या लेके आये थे जो ले  के जाओगे

गलतियाँ सबसे होती रहती

गलतियाँ सबसे होती रहती उसूल है जिंदगी का  आम नागरिक हो या सरकार सफर काँटो भरा,, वक्त सुधारने का है लड़ने से दुश्मनों को फायदा  जनता की राय से सरकार को हीं होगा फायदा,, लोभ लालच में आके कहीं सरकार को हीं बेच दे  भरस्टाचार में लीन जो कहीं जनता को लूट ले,, हालात फ़िर सुधर जाये भरस्टाचार ख़त्म होने से    जनता के क्रोध से कौन बचा जो बच पायेगा,, अत्याचार ठीक नहीं क्यूँकि महँगाई बहुत ज्यादा  सबको मिलें राहत तो होगा तकलीफ़ आधा,, ठूँस दे पुलिस जेल में ले जाके भरस्टचारियों को  जनता को क्यूँ मिले सज़ा अत्याचारियों से,, मुज़रिम गुनाह करना छोड़ता क़ानूनी कार्रवाई से  भरस्टाचार में लीन कहीं पुलिस हीं तो नहीं,, राहत सरकार से मिली गरीबो को बेरोजगारों को  बेरोजगार किरायेदारों को कहाँ मिली राहत,, राशन कार्ड से पाँच किलो राशन एक किलो चना  पॉँच सौ रूपये से बेरोजगारों का क्या होगा,, बहुत हो रहा अत्याचार भरस्टाचार में लीन हैं सब  जनता जागरूक होने लगी जल्दी सोंचो अब,,

कोरोना से बुरा हाल

कोरोना से बुरा हाल महँगाई से बुरा हाल  नौकरी और ब्यापार का भी यही है हाल,, सभी नागरिको को एकसमान अधिकार  लोकतंत्र देश हमारा तो कौन जिम्मेदार,, मुश्किलें आती रहती क्यूँ नहीं की तैयारी  मौका मिला है सँभाले अपनी जिम्मेदारी,, मुश्किल हालात में सभी नागरिको को पैसा मिलना चाहिए  चाहे इसके लिए नौकरी करने वालो के तनख्वाह को कम  करना पड़े , नये रोजगार के अवसर ढूँढने का प्रयास किया  जाना चाहिये , खली बैठा के तनख्वाह देने से अच्छा कोई काम करवाया जाना चाहिये. नौकरी का अवसर उपलब्ध कराना सरकार जिम्मेदारी है तो  एकसमान तनख्वाह पे विचार कर महामारी खत्म होने तक ऐसे प्रोजेक्ट में पैसा ना लगाए जिससे फायदा नहीं नुकसान  ज्यादा और पैसा डूब जाने से मुस्किले बढ़ जाये. कानून बनाये की महामारी खत्म होने तक बेरोजगार लोगो  का खर्च सरकार उठाये, सरकार सभी नागरिको के लिए है तो ऐसे हालात में सरकार की जिम्मेदारी है सभी नागरिको को जीवित रखना. आटा चावल दाल सब्जी तेल मसाला सस्ता उपलब्ध कराना  सरकार का फ़र्ज़ है क्यूँकि बेरोजगारी रोजाना बढ़ती जा रही  बैंक को ब्याज मुक्त लोन उपलब्ध कराना चाहिए इसे घाटा  नहीं अवसर समझे ग्राहक बढ़ान

भुखमरी से बेहाल सरीफ़

भुखमरी से बेहाल सरीफ़ मुज़रिम बनजाता  भीख माँगता गिड़गिड़ाता चीखता चिल्लाता,, उसका ये जो हाल सराफ़त की निशानी होती  बेईमानो के लिये तो सिर्फ़ एक कहानी होती,, मरता क्या नहीं करता वो सराफ़त छोड़ देता  माँगने से नहीं मिलने पे छीन के खाने लगता,, लूटने की आदत पड़ने से गुनेहगार बन जाता  न्याय का रास्ता त्याग अन्याय पे उतर जाता,, भरस्टाचार अत्याचार फ़ीर मुज़रिम कहलाता  सिर्फ़ इन बेईमानो की वजह से ये हाल होता,, कोई महलों में सोता तो कोई सड़को पे रोता  मज़बूर होता भूखा ना होता ये हाल ना होता,, दुःख होता काश ऐसा ना होता शराफ़त होता  कोई भूखा ना सोता और सड़को पे ना रोता,, सभी सराफ़त में जीते कोई बेईमान ना होता कोई मुज़रीम ना होता कोई भूखा ना सोता,, दोस्तों आज अमीर हो या गरीब असुरक्षित तो सुरक्षित क्या कुछ भी नहीं दिनपर दिन हालात बद से बत्तर होते जा रहे है. ऐसे में सभी को अपने अन्दर पनप रहे क्रोध को शान्त करना  एक दूसरे की मदद करना काँटा नहीं फूल बनना आवश्यक है पैसा सिर्फ एक कागज़ जिसमे जान नहीं मग़र किसी की जान बचा सकता है इसलिए हम जो पैसा उड़ाते ऐय्यासी में उससे किसी को कुछ वक्त के लिये ही सही लेकिन खुशियाँ दे मदद क

लालची दुनियाँ में

लालची दुनियाँ में लालच सबसे माहान  भगवान ना इंसान शैतान सबसे माहान,, कागज़ के नोटों पे बेच देते अपना ईमान  धर्म इज़्ज़त शान बेच देते अपनी पहचान,, मन की बातें मन में दिल में धन की चाहत  तन के सुख के लिये धन से मिलती राहत,, कोरोना की महामारी ने आँखों से दिखाया  अपनों को परायों को जानना सिखलाया,, कौन कहता नहीं होते भगवान और शैतान  भगवान को पहचान और शैतान को जान,, गुरु का ज्ञान ज़रूरी जैसे कोरोना देता ज्ञान  अपनों को पहचान दुश्मनों को ढँग से जान,, भैंस के आगे बिन बजा के वैसा बन जायेगा  कुछ भी समझ ना पायेगा लुट के ले जायेगा

मन की बात

बहुत कर लिया मन की बात खुल के बोलो आज  बताओ हर बात जिससे जनता आपके साथ,, बोलो क्या सत्ता के लालच में देशभक्ति भूल गये  फुट डालो राज करो निति को क्यूँ अपना गये,, मेहनती या मज़दूर पे अत्याचार क्यूँ किया बर्दास्त  क्या लूटने का ईरादा जो करते रहे आत्मघात,, चमचो को पैसा खिला पार्टी का नारा क्यूँ लगवाते  गरीबों को रोजगार देने के नाम पे वोट ले जाते,, नशीला पदार्थ की आदत लगवाते दारू बिकवाते  जनता को क्यूँ बिगाड़ते भरस्टचारी क्यूँ बनाते,, देश के गिने चुने नागरिको को हीं रोजगार दे पाते  पैसा कहाँ बहाते ग़रीबी बेरोजगारी क्यूँ बढ़ाते,, दुश्मनों के सँग दोस्ती कर अपना देश क्यूँ लुटवाते  जनता को गुमराह कर वोट लेने क्यूँ चले आते,, ग़रीबी क्यूँ भुखमरी क्यूँ बेरोगारी क्यूँ बीमारी क्यूँ  मन की बात करते लेकिन सच क्यूँ नहीं बताते,, सभी जानते आप इन्सान हो भगवान क्यूँ कहलाते  सोच समझ का फैसला जल्दीबाजी में सुनाते,, सवाल भी उन्ही से पूछे जाते जिसे हम अपना मानते  मज़ाल किसका है जो गैरो पे ऊँगली उठा दे,,

क्यूँ गुमराह करते हो

क्यूँ गुमराह करते हो  सवाल के जवाब में सवाल पूछ लेते हो  पुरानी बातों को उखाड़ दिल जला देते हो  हालात पे मज़बूर कर अपना पल्ला झाड़ते हो  राज करने की निति से जनता को क्यूँ सताते हो  सच को झूठ को छुपाते हो नया सवाल बनाते हो  पैसे वाले कोरोना से ठीक हो जाते  गरीब क्यूँ मारे जाते बीमारी से तो भूख से  गरीबी अमीरी लोगो में फुट डाल मुस्कुराते हो  अच्छी राजनीती में फँसाते हो बातों में घुमाते हो  राम जैसे दीखते पर रावण नज़र आते हो सताते हो  दुसरो को दोषी ठहरा कब तक सच छुपाओगे  तुमने क्या किया इतने सालो में सच कब बताओगे  राज करने की निति राजनीती से क्या राजा बन जाओगे  उखाड़े जाओगे अगर अन्याय करोगे बहुत हीं पछताओगे  अबतक सरीफ अब गुनेहगार नज़र आने लगे  सारी गलतियों का पहाड़ नज़र आने लगे बस करो  जनता को झूलो पे झूला रहे ग़लती अपनी छुपा रहे  अपनी इज़्ज़त खुद हीं मिटटी में मिला रहे मुस्कुरा रहे  मौत देने से अच्छा जिंदगी तो क्यूँ भटका रहे  मॉल में जाने से अच्छा सड़क तो क्यूँ खुलवा रहे  शराब पिने से अच्छा शरबत तो क्यूँ शराब बिकवा रहे  सवाल है मग़र जवाब देने से पहले सवाल में उलझा देंगे  कब तक बेवकूफ़ बनायेंगे और जनता

हार गया वो हार गया

हार गया वो हार गया अपनी इज़्ज़त उतार गया  झुक गया कमज़ोर हुआ दुश्मनों के साथ गया,, भेद भाव की भावना से गरीबों को वो मार गया  हार गया वो हार गया अपनों को ही मार गया,, दुश्मनों से हार गया अपनों से हार गया मार गया  बेच के इज़्ज़त मर्यादा दोस्तों से भी हार गया,, हार गया वो आत्महत्या कर ख़ुद को हीं मार गया  कायर था जो हार गया दुश्मनों से भी हार गया,, लड़ना झगड़ना जब है जरूरी जब होता अन्याय  जो हार गया कायर कहलाये जितने वाला हीरो,, लड़ना सिखों समाज से जब समाज़ में अन्याय हो  भले ही जीत उनकी हो आत्मरक्षा का सम्मान हो,, अनेकों प्रकार के दुश्मन मौज़ूद अपने और पराये  जो साथ ना दे सच का दुश्मनों से भी हार जाये,, सच बोलो जैसा पेड़ लगाओगे फल वैसा खाओगे क्यूँ झूठ का सहारा लेते अपने जैसा बनाओगे 

जेल से ज्यादा ख़तरनाक गुनेहगार

जेल से ज्यादा ख़तरनाक गुनेहगार जेल के बाहर  जिंदगी मौत के साथ खिलवाड़ करते फँसा जाते,, उन्हें समझना भी मुश्किल पैरवी के साथ फँसाते  मासूमो के जिंदगी बर्वाद कर नया तालाश लाते,, जानबूझ के गुनाह करवाते मज़बूर कर फँसा पाते  कानून के बंधन में बाँध मासूमों को सज़ा दिलाते,, मासूम जो ज़मानत पे बाहर आते फ़िर फँसा जाते  पैसा खिलाके वकील पुलिस को केस लगवाते ,, आत्महत्या करने पे मज़बूर कर अपने जैसा बनाते  गुनाह करवाते फँसाते सज़ा दिलवाते नया लाते ,, पैसो का सब खेल माहिर खिलाड़ी हीं जानता खेल  अनाड़ी बेचारा मज़बूर होता आत्महत्या कर लेता,,  जो सच बताना चाहे उसे धमकी देते गुंडों से पिटवाते  परिवार को खत्म करने की धमकी दे सज़ा कटवाते 

बहुत रुलाया तू भी रोया

बहुत रुलाया तू भी रोया अब चुप क्यूँ नहीं होता  आगे से सब ठीक होगा गलत नहीं काश ऐसा होता,, बदल गया है देश क्यों नहीं बदले देश की जनता  बेरोजगारी बीमारी भुखमरी से दुःखी है देश की जनता ,, कोरोना की महामारी सब जानते खतरनाक बीमारी  आने वाली मुसीबत के लिये पहले से क्यूँ नहीं की तयारी,, राजा का कर्तब्य होता अपनी प्रजा को खुश रखना  दुश्मनों से उनकी रक्षा कर हर क़दम पे उनकी सहायता,,  जनसंख्या इतनी फ़िर क्यूँ मज़बूर है देश का राजा  भरस्टाचार में लीन सहायक को देश से क्यूँ नहीं भगाता,, जान की जोख़िम ज्यादा फ़िर भी मज़बूर है मज़दूर  पेट ना होता भेंट ना होता साहेब दुःखी है देश की जनता,, कैसी ये निति जनता दुःखी कैसी देश की राजनीती  क्युँ चुप है राजा क्युँ नहीं पहले निति को ही बदल जाता,, चमचों और चापलूसो से क्युँ दूर नहीं जाता राजा  आज भी दुःखी देश की जनता नीतियों से राजनीतियों से,, उसने ये किया उसने वो किया छोड़ो तुमने क्या किया  आपस में लड़ने लगे देश आजाद हुआ अब गुलाम बनेगा,, सुन के अनसुना कर देना भी एक प्रकार की राजनीती  लालच देके भ्रमित करना जनता पे अत्याचार कैसी निति,, एक तरफ़ कहते प्रजा के हित में क़दम उठा

सुपरफ़ास्ट कम्प्यूटर

जापान ने फुगाकु एक सुपरफ़ास्ट कम्प्यूटर बनाया  हमारे भारत ने सभी सच से लड़ने वाले को दबाया,, दुनियाँ कहाँ से कहाँ पहुँची मग़र हम वहीं है आज  ना जाने कब बदलेगा समाज जहाँ कल वहीं आज,, भुखमरी बेरोजगार अत्याचार भरस्टाचार में समाज  आसमान को छूने वाले हिम्मत को देते हैं अवकाश,, अपना पेट भरने में भरस्टाचार से समाज में भड़ास  ना जाने कब सुधरेगा समाज लगी है कुछ की आस,, पेट ना होता भेंट ना होता मज़बूरी में लीन है समाज  पढ़े लिखे मज़दूरी करते यही आज कल का समाज

गर्भवती को जेल

गर्भवती को जेल ये कैसा तूने न्याय किया  समाज असुरक्षित है तूने भी अन्याय किया ,,  धर्म प्रधान देश में उन्हें क्यूँ नहीं भेजा जेल  सज़ा देके क्यूँ कहते हम खेले न्याय का खेल,, गर्भ में पलते शिशु क्या माँ गलत सिखाती  पापियों को मिटाने के लिये हीं तो चिल्लाती,, धरती माँ को कलंकित कर राजा बना कैसा  जा भोग सज़ा तू भी गुनेहगार रावण के जैसा ,, दो किताबें पढ़के बनते देखा लाखों ज्ञानी बाबा  लूट खसोट के ले जाते यही तो है देश के अभागा ,, समाज सुरक्षित कहके और कितनो को लूटेगा  धर्म प्रधान है देश मग़र कहाँ कोई भाग्य विधाता,, ग़रीबी अमीरी का भेद फिर क्यूँ गुनेहगार से डरता  अपनी जान के रक्षा के लिये कानून से तू भी लड़ता 

अँधेरा ही अँधेरा

अँधेरा ही अँधेरा कभी साँझ कभी सवेरा  कर्ज़ा लेके डूबा जा रहा उसका रैन बसेरा,, आज़ादी के तलाश कोई पार लगा दे बेड़ा  ढूँढा मग़र नहीं मिला बस अँधेरा हीं अँधेरा,, आत्मनिर्भरता की ओर मोह माया का घेरा  बुद्धि मति ने त्याग दिया अज्ञानियों का डेरा,, भरस्टाचार में लीन है सब कौन बने सवेरा  कर्ज़ा लेके डूबा जा रहा उसका रैन बसेरा,, स्वर्ग के जैसी धरती माँ पे पापियों का डेरा  जंगल में जाता दिख रहा साँझ और सवेरा,, प्रलय नहीं तो क्या है ये राजा हो या रंक  आपस में भिड़ते जा रहे माथे लगा कलंक,, कौन समझाये विदेश की निति राजनीती  भक्त बना भगवान चारो ओर सिर्फ शैतान 

खोटा सिक्का

खोटा सिक्का भी काम आता  जब सिक्का नाकाम हो जाता,, अहमियत निक्क्मे की भी होती  वही उथल पुथल कर डुबा जाता,, कभी अनपढ़ भी काम आ जाता  जब पढ़ा लिखा नाकाम हो जाता,, सलाह सबकी सुनो सच को चुनो  सच को हीं मानो झूठ को पहचानों ,,  समाज में रहकर सबसे बैर नहीं करते  सच का साथ झूठ के बगैर नहीं लड़ते,, सच का रास्ता कभी रोका नहीं करते  झूठ सच के साथ हो टोका नहीं करते 

बाबा रामदेव की जय

बाबा रामदेव की जय जय जय  अब बाबा ऐसी दवा बनायें की,, भारत में दारू गुटखा पान बीड़ी  सिगरेट अफ़ीम गांजा बंद होजाये,, बलात्कार अत्याचार भरस्टाचार  मानहानि आदि से छुटकारा मिले,, रक्षक रक्षा करें लालची भक्षक नहीं  शिष्टाचार में रहें भरस्टाचार में नहीं,, नारी को सम्मान मिले अपमान नहीं  न्यायपालिका न्याय करे अन्याय नहीं,, बच्चो को प्यार दुत्कार अत्याचार नहीं  गरीबों का कल्याण हो ग़रीबी खत्म हो,, अनपढ़ो को शिक्षा मिले सत्ता ना मिले  पढ़े लिखो का सम्मान हो अपमान नहीं,, घमंडी अहंकारी स्वभाव का विनाश हो गुरु जो शिक्षा दे ज्ञानी हो अज्ञानी नहीं 

पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों को देखा

पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों को देखा  अनुमान लगाया सरकार क्या कर रही,, बहुत सोंचा तब जाके निष्कर्ष निकाला  शायद अच्छा गरीबों के भलाई के लिये,, अमीरी गरीबी भेद ख़त्म करने के लिये  अमीरो से लेके गरीबों में पैसा बाँट रही,, फायदे और भी है जो शायद ज्ञात नहीं  वायरस का ख़तरा देख कर रही मज़बूर,, घर पे रहें सुरक्षित काम से बाहर जाये  फालतू में ना घूमें संक्रमण से बचाव करें,, हमसे ज्यादा चिंता हमारी सरकार को है  महामारी से लड़ने के लिये प्लान करना,, दोष देना है तो सभी पार्टी को एक को नहीं दोषी तुम भी हो तुमने ही सरकार चुना है

जो दिया उसके लिए धन्यवाद

जो दिया उसके लिए धन्यवाद  जो लिया उसके लिए धन्यवाद  सम्मानित किया उसके लिये धन्यवाद  ज्ञानी हो तुम भगवान दिल से धन्यवाद  धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद  फैसला किया उसके लिये दिल से धन्यवाद  भगवान जगननाथ की रथ यात्रा निकालने के लिये  सरकार पर विश्वास कर अपना फैसला सुनाने के लिये  कुछ शर्तो के साथ यात्रा पर जाने के छूट देने के लिये  धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद 

वक्त और हालात

वक्त और हालात को मद्देनज़र देखता हूँ  भगवान कृष्ण, राम, हनुमान अगर होते,, कानून के द्वारा दोषी सज़ा काट रहे होते  एकजुटता समाज में कहाँ देख पाते लोग,, फुट डालो राज करो निति अपनाते लोग  पार्टी पार्टी खेल रहे आपबीती है कहानी,, कोई बेचारा भूख का मारा तड़प कर मरा  तो कोई राज का दुलारा फ़ैसला सुना डरा,, बुद्धि ज्ञान से सिर्फ समझाया जा सकता  सुधरना बिगड़ना समाज सीखा जाता है,, सुधारना था तो समाज को क्युँ नहीं सुधारा  सबकुछ देख आँखे मूंद अपना पल्ला झाड़ा,, क्युँ कहते है लोग कानून अँधा होता जा रहा गवाह सबूत को देख कर फैसला सुना रहा,,

चाय पिने में मज़ा

चाय पिने में मज़ा ज्यादा आता  जब कोई चाय पसंद की पिला जाता,, फ्री में या कम पैसों में बनाकर पिला जाता  चाय नहीं अमृत है दोस्तों सबको पीना पड़ेगा,, चुस्की के साथ सच झूठ के साथ जीना पड़ेगा  गर्मी में और गर्मी के अहसास के लिये जरुरी है चाय,, हँस के पियो रो के पियो पीना तो है मज़बूरी है चाय  ये सब ख्वाब है दोस्तों भला अच्छा चाय कौन पिलाये,, एक जैसी चाय भला कोई कब तक पिलाये क्यूँ पिलाये  फूँक के पियो चाय अबसे कहीं फिर से मुँह ना जल जायें,, संभल जाओ बहुत पि लिया चाय कहीं सिरदर्द बन जायें  फ्री में छोड़ो महँगाई के ज़माने में पैसा हीं चाय पि जाये,, चाय में अब वो मज़ा नहीं इज़्ज़त से कौन पिलाये  बिना इज़्ज़त चाय हज़म कहाँ हो पाये,, चाय पिने में मज़ा अब कहाँ से लाये  किसे अब चाय वाला बनाये,,

सारे दोष राजा को ही दोगे

सारे दोष राजा को ही दोगे प्रजा ने क्या किया  आपस में लड़ते रहे दुसरो की खामियाँ बताते रहें,, अजीबोग़रीब सवाल पूछ कर प्रजा को उलझाते रहें  कोई सलाह दिया होता ज्ञान के सागर में डुबकी लगाके,, शायद कुछ अच्छा हो जाता शायद अच्छे दिन आ जातें  सबको अपनी कुर्शी अपनी जिम्मेदारी से मतलब होता,, आपस में लड़ते झगड़ते उन्हें दुनियादारी से क्या मतलब  जिंदगी मिली है कुछ तो करेगा वफ़ादारी से मिलता क्या,, अच्छा करेगा तब भी ताना बुरा करेगा तब भी ताना सुनेगा  इन्सान है भगवान नहीं गुस्सा होके ग़लती भी तो करेगा,, ग़लत हो रहा तो ग़लती तुम्हारी एकसाथ आवाज उठाओ सिस्टम बदलो अपने-आप को बदलो राजा को समझाओ,, खामियाँ मत निकालो रास्ता बतलाओ सबको समझाओ  मुझे भी पता कुछ नहीं बदलेगा लेकिन प्रयास करते रहो,,   देश का सच्चा नागरिक धर्म निभाओं सच्चाई बताओ आवाज़ उठाओ सबको समझाओ बदलाव लाओ

मरीज़ बढ़ते जायेंगे दिन पर दिन

मरीज़ बढ़ते जायेंगे दिन पर दिन  ख़तरा कभी कम नहीं होगा बना रहेगा,, हॉस्पिटल में बेड की कमी डॉक्टर की कमी  कोरोना पॉजिटिव अगर होम क्वारंटाइन होंगे,, कोई ना कोई गलती करेंगे या जानबूझ के करेंगे  अपना सारा गुस्सा खुन्नस असुरक्षित पे निकालेंगे,, सलाह माने तो कोरोना पीड़ित मरीज़ो के लिए  अलग से राज्य बनायें उन्हें वहां ले जायें,, इलाज़ की सुविधा उपलब्ध करायें  कोरोना से मुक्त राज्य बनायें,, मरीज़ कम होते जायेंगे दिन पर दिन  हॉस्पिटल संक्रमण मुक्त हो पायेगा,, संक्रमण से बचे लोगो का इलाज़  कोरोना मुक्त राज्य कहलायेगा,, ये सब मुमकिन है अभी संक्रमण ज्यादा फैला नहीं  ज्यादा फ़ैल जायेगा तो इलाज़ नहीं हो पायेगा,, डॉक्टर भी डर जायेंगे ड्यूटी पे नहीं आयेंगे  काम काज ठप अर्थब्यवश्था चौपट,, लोकडाउन अच्छा विकल्प मग़र अर्थबवस्था  चौपट हो जाएगी भुखमरी आ जायेगी,, कोरोना से ज्यादा भूख से मरेंगे  डिप्रेशन बढ़ जायेगा,, अपने विचार बतायें सुझाव को अपनायें  धन्यवाद

आत्मरक्षा करना पड़ेगा

दिनपर दिन हालात बद से बदत्तर होते जा रहे ,ऐसे में मानसिक तनाव का बढ़ना भी जायज है. जोख़िम ज्यादा बढ़ गया ,अब नौकरी भी मुश्किल से  मिलती मिल भी जाये तो जोख़िम ज्यादा. मरीज़ कम नहीं बढ़ते जा रहें है ऐसे वक्त में कोई गुनाह  करता वो सज़ा का हक़दार है  मानसिक तनाव जो उत्पन्न हो रहा कौन जिम्मेदार है  इतना जो हुआ इसमें कौन गुनेहगार है. क्या उसके लिये कानून, नियम, जिम्मेदारी नहीं है  उसकी गलती पे सज़ा क्यूँ नहीं सुना रहें. हमें अब  आत्मनिर्भर होना पड़ेगा  आत्मरक्षा करना पड़ेगा  आपको कुछ होता उसके आप जिम्मेदार है 

मान मेरी बात सुन देख आया मानसून

मान मेरी बात सुन देख आया मानसून  इंतज़ार हुआ खत्म इज़हार कर शुकुन,, हर तरफ ख़ौफ़ का माहौल में तेरा आना  रेगिस्तान जैसे गर्मी में शुकुन मिल जाना,, दरवाजे खिड़कियों को झकझोर के जाना  चारो ओर से तेरा आना ख़ुश होता ज़माना,, दिल से दिल मिलाना पक्षियों का चहचहाना  शुकुन मिल पाना जैसे लाश जिन्दा हो जाना,, तन्हाई में भी मुस्कुराना वाह तेरा आना जाना  तेरे बिना मुश्किल ये जमाना आज मैंने माना,, बारिश की बुँदे और फुहार से यार करूँ प्यार  आगे क्या होगा किसने जाना यहीं है दिलदार 

लड़ते भी हो लड़ाते भी हो

लड़ते भी हो लड़ाते भी हो ये ज्ञान हीं तो है सच बाहर लाते हो झूठ अफवाह मिटाते हो,, खुशियों के लिए आप क्या नहीं करते सबकुछ  अजीबोग़रीब कहानी सुनके सब हो जाते हैरान,, शौकिया मिज़ाज़ आपका इधर उधर भी देखो  परिवार के साथ रोड पे सोता तो कोई महल में,, दो अक्षर पढ़ लिखकर अनपढ़ो को सताओगे  आज तो गुज़ारा हो जायेगा कल कहाँ जाओगे,, तरक्की से अमीर तो बन जाओगे नाम कमाओगे  ठोकर लगेगा जब गिरोगे बताओ कैसे उठ पाओगे,, प्रोमोशन सबको अच्छा लगता डिमोशन भी होता  डिमोशन के बाद डिप्रेशन फिर प्रमोशन कहाँ होता 

सर्वदलीय बैठक

आज होगा कुछ तो होगा अच्छा हीं होगा  सबकी राय बिचारों से सबके अनुभवों से,, निर्णय लिया जायेगा सोंच बदला जायेगा  सभी मुद्दों पे बहस या कोई एक मुद्दा होगा,, सर्वदलीय बैठक जनता हित के लिये होगा  जोश में है सब आवाज़ उठेगा अब बदलेगा,, सबकी सोंच सबके विचार सबके ब्यवहार  ज्यादा पढ़े लिखे है हम अनेकों विचार आयेंगे,, सोंच को बदल जायेंगे मज़दूर बदलाव लायेंगे  गरीब अब गरीब नहीं शायद अमीर बन जायेंगे,, देश के हित के लिये सभी नया फ़ैसला सुनायेंगे  आज होगा कुछ तो अच्छा पूरा यक़ीन है उनपे,, आज होगा कुछ तो अच्छा पूरा यक़ीन है खुदपे  आज होगा कुछ तो अच्छा पूरा यक़ीन है सबपे 

युद्ध के लिये

बहुत जल्दी है कुछ लोगो को युद्ध के लिये ,येह तो ऐसा हीं जैसे बारात आने पे कुआँ खोदना , जान लिया पहचान लिया मान भी लिया मग़र तैयारी पूरी होनी चाहिये , कई मामलों में आपसी सहमति नहीं बन पा रही सबकी , एक जैसा राय बिचार आपसी मतभेद आपस में लड़ना झगड़ना ये सब होता रहता है. ऐसे वक्त में सबका साथ सबका विकास और साथ में अच्छी रणनीति , माना की भारत महान है सब पढ़े लिखे समझदार भी है लेकिन कुछ मामलों में बहुत पीछे है ऐसे वक्त में दोस्तों का साथ जरुरी हाथ मिलाना जरुरी उसके बाद फैसला लिया जाये तो येह जँग जीत जायेंगे. सब्र का फल मीठा होता है जल्दीबाज़ी ना करें पहले तैयारी करें , टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें सहायता लें दोस्तों से , एक दूसरे का सहारा बने अपनी कमज़ोरी बतायें उनके चाल को समझें , मांग पूरी ना करें हम कायर नहीं मग़र जांचे परखे फ़िर कदम बढ़ायें . जोश में आके होश खोने की जरूरत नहीं , छोटा हो या बड़ा दुश्मन घातक होता है , उसके बारे में पूरी जानकारी ले जो दे रहा जानकारी रामभक्त हनुमान जैसा है उसकी बात सुने हो सकता है किसी विषय में आपसे ज्यादा नॉलेज हो उसका प्लानिंग के साथ आदेश का पालन कर विजयी प्राप्त किया

पड़ोसी मुल्क

पड़ोसी मुल्क जलने लगें तरक्की से मचलनें लगें  एक बिहारी सौ पे भारी जानशंख्या बहुल हमारी,, मेहनत जो भी किया तुमने अब फ़ल मिलने की बारी  पूरा देश खड़ा अब एकसाथ अब सरकार करे तैयारी,, चीनी मिला के चाय पियेंगे आतंकवादी को सुलायेंगे  ख़ुद से मोमोज़ बनायेंगे और दाल भात चोखा खायेंगे,, भारत माता की जय का भजन दुनियाँ को सुनायेंगे  चाहे कितना घेराबंदी करो जीत को घर वापस आयेंगे,, बोलो भारत माता की जय  बोलो जय श्री राम जय सीताराम  बोलो जय हनुमान जय बजरंगबली 

हारी मनवा मत ना हारी जीत होगी तुम्हारी

हारी मनवा मत ना हारी जीत होगी तुम्हारी l बदली दुनियाँ सारी बेचारी साथ है महतारी ll हाथ ना जोड़ी दिल ना तोड़ी ना तोड़ी रिस्तेदारी l करुँगी तेरे घर की रखवाली बनके तेरी घरवाली ll तुझीसे मेरी दिलदारी यारी जाने दुनियाँ सारी l लेनदारी देनदारी तुझीसे हिम्मत से दुनियाँ थारी ll पइसा कमाते इज़्ज़त कमाते बनूँ मैं राधा थारी l कृष्णा कृष्णा कृष्णा कृष्णा जपूँ मैं नाम तुम्हारी ll जो खाओगे बनाऊँगी कपड़े लत्ते चमकाऊँगी l सेवा करुँगी दासी बनके पत्नी धर्म निभाऊँगी ll हाथ जोड़ी खड़ी तेरे आगे मान जाओ कृष्णमुरारी l बदली दुनियाँ सारी बेचारी बस उम्मीद बची है थारी ll राज़ की बात बताती हूँ लोभी है दुनियाँ सारी l मायाजाल में क्यूँ फँस जाते दोस्ती जिम्मेदारी ll

हँसता हुआ चेहरा अन्दर से बहुत रोता

हँसता हुआ चेहरा अन्दर से बहुत रोता  सबखुछ खोके भी हँसता मुस्कुराता होता,, कभी गुस्से से कभी प्यार से कभी नफ़रत से  उम्मीद में होता अच्छा हुआ मैं कोई और नहीं,, बदला कौन नहीं चाहता बदलाव भी जरुरी है  छोटी मोटी गलतियों के लिए माफ़ी भी जरुरी है,, हरबार एक हीं गलती पे समझाना बदला मज़बूरी  समझ जाये तो माफ़ करना बदलाव लाना जरुरी,, लालची बनती जा रही दुनियाँ हम भी तो कम नहीं  थोड़े पैसो सुख के लिये दुश्मनों से दोस्ती कर लेते है,, धोखा बारबार मिलता फ़िर भी समझ नहीं पाते है  लालच में आके बारबार वही गलती दोहराते जाते है,, बहुत कुछ खो दिया अपनों को सपनों को अब नहीं  और नहीं ग़म को भुला के मुस्कुरायेंगे बदलाव लायेंगे,, हँसता हुआ चेहरा अन्दर से बहुत रोता हँस के दिखायेंगे  बहुत कुछ खो दिया अब बदलाव के साथ हम मुस्कुरायेंगे 

बढ़ती गर्मी के साथ ख़ून खौलने दो

बढ़ती गर्मी के साथ ख़ून खौलने दो  आजाद भारत को ईनाम दो कुचल दो,, उन चींटियों को तेरा पैर ही काफी है  उड़ा दो आसमां में तेरा फूँक ही काफी है,, नशा बहुत करते होश में जोश में आओ  आदेश का पालन कर आगे कदम बढ़ाओ,, धरती माँ की रक्षा में चींटियों को खदेड़ो  भून डालो चाहे कुचल डालो चाहे फूँक मारो,, मौका फिर नहीं आयेगा सही मौका चौका मारो  भारत महान देश के नागरिक हो आरती मत उतारो,, उन चींटियों का दग़ाबाज है फिर से दग़ा कर जायेंगे  जान लिया पहचान लिया मान लिया दग़ा कर जायेंगे

सुन्दरता किसे पसंद नहीं आती

सुन्दरता किसे पसंद नहीं आती  छछून्दरो को छोड़ के चली जाती,, क्यूँ करते हो नशा ग़म भुलाने के लिये  जिन्दा लाश हीं बन जाते ज़माने के लीये,, सफर जिंदगी आसां नहीं मुश्किलें क्यूँ बढ़ाते  नशा करके भटक जाते नशा छोड़ क्यूँ नहीं जाते,, हालत कैसी तेरे घरबार की सुधर क्यूँ नहीं जाते  समाज का रक्षक बन नशेड़ियों को क्यूँ नहीं भगाते,, देखो समाज में हर तरफ़ भरस्टाचार अत्याचार हो रहा  ख़ुदको सज़ा देते या मज़ा पता नहीं क्यूँ सुधर नहीं पाते 

बड़े बड़े निडर भी डर जाते

बड़े बड़े निडर भी डर जाते हैं  परिस्थिति ऐसी हो तो बिखर जाते हैं,, तानासाही में सब झुक जाते हैं  जो आवाज उठाये कुचल दिये जाते हैं,, सलाह जो मान लेते अपने प्रजा का  वो एक राजा बन उभर आते नाम कर जाते,, डर के आगे जीत मग़र डर भगाना जरुरी  सबका साथ एकसाथ एकहाथ यहीं है मज़बूरी,, असली दुश्मन को पहचान कर रणनीति तैयार हो  दुश्मन का बिनाश हो देश बिदेश में नाम हो पहचान हो,, कमज़ोर कर अर्थबवस्था सबको दुश्मन बना दिया  देखो उसने क्या किया गद्दार दुनियाँ को दुश्मन बना लिया,, साथ मिले सबका जंग छोटी मोटी है जीत जायेंगे  क्या लेके आये थे क्या लेके जायेंगे कहानी बदल जायेंगे,, नई कहानी हमारी अध्यापक स्कूल में पढ़ाएंगे  नई सोच से बिचार हम सब मिलकर दुनियाँ बदल जायेंगे 

बहुत ही दुःखद समाचार है और प्रचार है

बहुत ही दुःखद समाचार है और प्रचार है  कोरोना से लाचार तो है मग़र मेरा यार है,, बड़े दिनों बाद हुआ ये हाल है वो बेहाल है  तबियत ठीक हो जाये अब यहीं सवाल है,, प्रश्नचिन्ह बना कोरोना कब उत्तर मिलेगा  उत्तर मिल जायेगा दर-दर भटकना पड़ेगा,, उत्तर को समझने के लिये प्रश्न बनना पड़ेगा  प्रश्न में उत्तर इसे हमसबको समझना पड़ेगा,, सवाल में जवाब किस किस को ढूढ़ने चला  कोरोना से बेहाल किसका हाल पूछने चला,, मदद कर एक दूसरे की बीमारी भाग जायेगा  क्या लेके आया था तू जो कुछ लेके जायेगा,, बिना कपड़ो के आया बिना कपड़ो के जायेगा  जब तक जिन्दा मास्क पहन बहुत पछतायेगा,, नशा जो तू करता थोड़ी देर बाद उतर जायेगा  मदद तो प्यार का नशा चढ़ता है चढ़ जायेगा 

डिप्रेशन एक ऐसी परिस्थिति भूल नहीं पाते

डिप्रेशन एक ऐसी परिस्थिति भूल नहीं पाते  चुभने लगती है कुछ बातें हर वक्त कुछ यादें,, हँसना तो कभी रोना कभी गुस्सा भी आता  खुशियों के पल को मानों कोई छीन ले जाता,, तड़पते तरसते रह जाते कोई सहारा ना मिलता  जैसे समुन्दर में हो नाव कोई किनारा ना मिलता,, उलझनें बढ़ने लग जाती सुलझाना आसान नहीं  जोड़ घटाव गुना भाग करना कोई भगवान नहीं,, कोई ताने सुन के परेशान चैन सुकून आराम नहीं  कोई परेशान मेरे पास सब कुछ पर मैं भगवान नहीं,, खुशियाँ बाँटने से बढ़ती है तो ग़म बाँटने से घटती  भीड़ भाड़ से भरी दुनियाँ कौन किसका साथ देता 

लड़ने झगड़ने से क्या मिलेगा

लड़ने झगड़ने से क्या मिलेगा  अपने रूठ जायेंगे सपनें टूट जायेंगे,, लड़ाने वाले फायदा उठायेंगे लूट जायेंगे  कोई मुसीबत हो तो अपने हीं काम आयेंगे,, लाभ उठायेंगे लड़ाने वाले लूट ले जायेंगे  रिश्तों की गहराई में अपनापन ढूढ़ना सीखो,, गलती हर इंसान से होती माफ़ी माँगना सीखो  कोई नहीं तेरा अपना रिस्ता जोड़ना पड़ता है,, ऊँच-नीच, भेदभाव सब छोड़ना पड़ता है  नफ़रत से प्यार किया नहीं जाता  प्यार से नफ़रत किया नहीं जाता,,   झुक जाने से कोई छोटा नहीं हो जाता  अकड़ दिखाने से कोई बड़ा नहीं हो जाता,, समझ नहीं उसे तुम समझाओं  दुश्मनों से भी रिस्ता जोड़कर दिखलाओं  कुछ तो बदलाव आयेगा 

दोस्त तूने क्या किया अच्छी दोस्ती निभाई

दोस्त तूने क्या किया अच्छी दोस्ती निभाई  दुश्मन बना फिर भी याद आती तेरी परछाईं,, लालची ना होता तू और मैं तो ये दिन ना आता  चाहे सब रिश्ते खत्म हो जाते ये दिन ना आता,, वक्त बदलता गया दूरियाँ बढ़ने लगी खत्म हुआ  तेरा मेरा साथ वो दिन सब याद अब पुरानी बात,, तू फेल ना होता मैं पास ना होता तू पास होता  मैं तेरे साथ होता दूरियाँ ना होती सब ठीक होता,, याद आता मुझें तेरा मेरा एडमिट कार्ड छुपाना  लालची था तू की दोस्ती ख़त्म होने का डर था,, याद आती सारी बातें भूली बीसरी वो सारी यादें  हाज़री लगाके क्लास में बस्ता छुपाना घूमने जाना,, पेड़ पे चढ़के दिवार कूद जाना और घूमने जाना  छुट्टी हो जाना दोस्तों का आना हमारा बस्ता लाना,, वो बचपन की यादें भुला नहीं पाते वो सारी बातें  रुलाने के लिये आते रुला जाते पर तुम ना आते,, दोस्ती दिल से होती लालची दोस्त ज्यादा मिलेंगे  अपना भला करने के लिए दोस्ती भी खत्म कर देंगे,, फूंक - फूंक के कदम बढ़ाओ दुश्मनों की कमी नहीं  कोई अनजान तुम्हारी मदद करें भगवान से कम नहीं 

चोरी तो चोरी एक रुपया या लाख की

चोरी तो चोरी एक रुपया या लाख की  फिर क्यूँ करे हम तारीफ़ बताओं आपकी,, एक ख़ून पे सज़ा सुनाते लाखों मुर्दा लाश  कहाँ गया कानून कोई क्यूँ है इतना खास,, माफ़ किया तो सबको करो देखों आस पास  कानून तुम रक्षक बनो सबके दिलों की आस,, महामारी के दौड़ में केस लड़े तो भूखा मरे  महामारी करो साफ़ या करो गुनेहगार माफ़,, सच्चाई की जीत के साथ झूठों का बिनाश  शातिर चोर बना बैठा अब करो गंदगी साफ 

थप्पड़ का जवाब थप्पड़

थप्पड़ का जवाब थप्पड़ नज़रो से उतर गया  दिल में इज़्ज़त थी उसके लिए जाने किधर गया,, जाने दो इज़्ज़त को मिट्टी मे हीं मिल जाने दो  थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से दो ऐसे ना जाने दो,, झुकना जरूरी नहीं कोई तेरा अपना यार नहीं  झुकना जरुरी नहीं कोई तेरा अपना प्यार नहीं,, रिश्ते की गहराई को समझो माँ बाप को समझों  अपनों को समझो परायों को समझो रिश्ते समझों,, डर से थप्पड़ क्या लात मुक्का भी खाना पड़ता  लेकिन मत भूलो जवाब जरुरी है डरना भी पड़ता,, मुर्ख नहीं जो झुक जाता जो लड़ जाता डर जाता  इंतज़ार करो वक्त का आयेगा तुम्हारे साथ जायेगा,, झुक जाना ग़र राह झूठ का हो खा लेना थप्पड़  सच के राह में झुकना नहीं आगे बढ़ते हीं जाना,, जो कर दिल से कर चाहे बनना पड़े जोकर  दिल के दिमाग की सुन चाहें सबकुछ खोकर 

ग़रीबी से अमीरी के सपनों का पनपना

ग़रीबी से अमीरी के सपनों का पनपना  ग़र रक्षक हो अपना भक्षक भी अपना,, पूरा हो हीं जाता सपना अपना अपना  अफ़सोस में रोना अमीरी का ना होना,, सबकुछ खोना फिर भी कुछ ना होना  अमीरों का इलाज़ है मुमकिन मग़र,, ग़रीब कहाँ जायेंगे बड़ा पछतायेंगे  गुस्से में आके गलत कदम उठायेंगे,, दोस्त दोस्त खेल रहा तो दुश्मन होंगे  कुछ अपने भी होंगे कुछ पराये होंगे,, सच की राह कठिन तो है सुकून भी है झूठ की राह आसान तो है चैन नहीं है 

समय के साथ चलना आसान नहीं

समय के साथ चलना आसान नहीं  घड़ी की बैट्री कोई निकाल जायेगा,, बिना पैसो के चाय कौन पिलायेगा  कुछ तो लेके जायेगा नहीं आयेगा,, अच्छे दिन कौन लायेगा ले जायेगा  घड़ी की बैट्री निकाल के ले जायेगा,, भूकंप के झटको के साथ दे जायेगा  और कोई नया झटका सोचने लगा हूँ,, सोच से ऊँची पहुँच कहाँ से लायेगा  कागज़ पे बनवायेगा या कहलवायेगा,, ऐसे थोड़ी ना जायेगा ज्ञान तो देगा हीं  हमने ये किया वो किया अच्छा किया,, सलाहकारों की सलाह उनके ज्ञान पे निर्भर करता  इन्सान गलत कोई नहीं होता हालात ख़राब करता 

झूठ-सच में किस-किस को फांसने चला

झूठ-सच में किस-किस को फांसने चला  किसी का घर उजाड़ कर किसका बसाने चला,, फैसला जो तूने किया किस-किस का भला किया  शायद तेरे साथ ऐसा हीं हुआ तभी तो बदला लिया,, गुनेहगार कौन नहीं है चंद रुपयों पे सब बिक जाते  खुदको को बदल नहीं पाते और दुनियाँ बदलने जाते,, सच पे पर्दा डालके कब तक झूठ का साथ देगा  उसका घर तो उजाड़ ही दिया अब क्या मार देगा,, हवस के पुजारी का साथ देगा नंबर तेरा भी आयेगा  जब तेरा जायेगा तो कहाँ जायेगा रोता हीं रह जायेगा,, सच को हज़म करना इतना आसान नहीं पछतायेगा  झूठ के सहारा कब तक सच छुपायेगा पकड़ा जायेगा,, इज़्ज़त बचाना है इज़्ज़त करना सीख तेरा भी जायेगा  वो तो नादान बन जायेगा इज़्ज़त तेरा हीं तो जायेगा 

साफ सुथरे कपड़े में दाग नज़र नहीं आते

साफ सुथरे कपड़े में दाग नज़र नहीं आते  धूल जाते है दाग ग़र लग भी जाये, पैसो से,, सैकड़ो हज़ारो लाखो कड़ोड़ो में  संक्रमण बढ़ जाने से जा रही हैं,, दुनियाँ बदलती जा रही  ग़रीबी बढ़ती जा रही  भुखमरी सता रही,, माँ अब डरने लगी क्या खाऊँ क्या खिलाऊँ  दिन पर दिन प्रतिदिन बदलाव से  कोरोना महामारी के डर से  कोरोना माई की पूजा से  अंधविश्वास बढ़ने लगी,, क्यूँ चुप है वो कुछ बोलता हीं नहीं  गुनाह - गुनेहगार बढ़ते जा रहे  दलदल में गिरते जा रहे  सवाल उठते जा रहे,, जानबूझकर अनजान क्यूँ बन जाते है  कोई इसारा करता चुप रहो  कोई आँखे बंद कर लेता  कोई कान बंद करता 

मुश्किल हालत में

दोस्त भी दुश्मन नज़र आता है  रिश्ते नाते टूट जाते है  अपने गैर हो जाते है  मुश्किल हालत में,, माँ बाप का सहारा हो तो वक्त गुज़र जाता है  पत्नी बच्चो का साथ हो तो खूब नींद आता है,, मुश्किल हालत में कुछ भी नज़र नहीं आता है  ऐसे हालत में जो मदद करे मसीहा बन जाता है,, दोस्त नहीं तो दोस्ती कैसा  तोड़ दो सब रिश्ते नाते  मौका चौका मारने का  गैर क्यूँ नहीं बन जाते,, उड़ा दे उन चींटियों को तेरा फूँक हीं काफ़ी है  माँ दूध पिया है तूने साँप का सुप नहीं,, पछतायेगा जब नाक में घुश जायेगा  बनजा नेवला कुतर दे उन साँपो को मौका है,, हाथी है कोई चींटी नहीं जो डर जायेगा  पछतायेगा जब ज़हर उगल जायेगा

एक से बढ़कर एक अनेक से बढ़कर नेक

एक से बढ़कर एक अनेक से बढ़कर नेक  फैसला तेरे हाथ में नहीं तो लूट जायेगा देश,, छोड़ दिया हाथ से हाथ मिलाना करीब से गुज़रना  दूर से प्रणाम किया गले से गले मिलाना छोड़ दिया,, साईकिल मोटरसाईकिल पे सवारी करना सुरु किया  पैदल चलकर सुरक्षित रहकर परिवार को ईनाम दिया,, मास्क पहनके जब निकला पुलिस ने सलाम किया  रेल बस मेट्रो पब्लिक में जाना ना के बराबर किया,,   कार चलना सिख लिया पर AC चलना छोड़ दिया  भीड़ में जब जाने लगा करीब से गुज़रना छोड़ दिया,, बाहर से जब घर आया कपड़े लत्तो को साफ़ किया  नाहा धोकर फ़्रेश होकर घर को साफ सुथरा किया,, सरकार का सहयोग कर देश दुनियाँ में नाम किया  परिवार का सहयोग कर परिवार को ईनाम दिया

आग जो लगाई तूने

आग जो लगाई तूने धू - धूकर जलने लगा  कभी हॅसने लगा कभी रोने लगा सोचने लगा,, बच्चा था क्या बन गया सच्चा था जो तन गया  अकड़ को जकड़ लिया नफ़रत से प्यार किया,, किस किस को धोखा दिया नाम बदनाम किया  रासलीला जो तूने किया जो किया अच्छा किया, थोड़ा वक्त लगा उठने में ओह फ़िर से गिर गया  सहारा मिला जब अपनों को भूल गया भूल गया,, लालची थी और घमंडी भी औरो से जलती रहती  हरकतें सुधरने लगी शादी किया मुझें आजाद किया,, अदनाम हुआ बदनाम हुआ नशा का गुलाम हुआ  अच्छा हुआ शादी किया नाम हुआ गुलफ़ाम हुआ

मामा ओ मामा ओ प्यारे चंदा मामा

मामा ओ मामा ओ प्यारे चंदा मामा..2 पापा को मानना मम्मी को मनाना  नानी के घर जाना तेरे संग जाना  मामा ओ मामा ओ प्यारे चंदा मामा ..2 दूध मलाई खाना है आइसक्रीम खाना  स्कुल नहीं जाना छुट्टी है बहाना  मामा ओ मामा ओ प्यारे चंदा मामा ..2 अभी छोटा बाबू हूँ और ना सताना  कर ना कोई बहाना नानी के घर जाना  मामा ओ मामा ओ प्यारे चंदा मामा ..2 दादी को मनाना दादू को मनाना  माँ के संग जाना छुट्टी है बहाना  मामा ओ मामा ओ प्यारे चंदा मामा मामा ओ मामा ओ प्यारे चंदा मामा मामा ओ मामा ओ प्यारे चंदा मामा मामा ओ मामा ओ प्यारे चंदा मामा

जलता है तो जलने दो

जलता है तो जलने दो  राख हो जाने ख़ाक हो जाने दो,, मिटटी में मिल जाने को पानी में घूल जाने दो  हवा नहीं जो रुक जाये सूरज में जल जाने दो,, दारू नहीं जो चढ़ जाये आँशु को बह जाने दो  माँ के लाड प्यार में बिगड़ा थोड़ा वक्त गुज़र जाने दो,, बाप में दुलार से निखरा थोड़ा बिख़र जाने दो  भाई ने समझाया थोड़ा गिरगिराने दो,, जलता है तो जलने दो  राख हो जाने ख़ाक हो जाने दो,, पत्नी के संग वक्त बिताने दो  दो तीन बच्चो का बाप बन जाने दो,, रिश्तों की गहराई में उतर जाने दो  समाज में रहने को सामाजिक बन जाने दो,, बेइज्जती मत करो इंसान ही तो है  इज़्ज़त बनाने को थोड़ा वक्त गुज़र जाने दो,, जलता है तो जलने दो  राख हो जाने ख़ाक हो जाने दो 

हर तरफ़ कीचड़ ही कीचड़

हर तरफ़ कीचड़ ही कीचड़  कमल को ख़िल तो जाने दो,, उछलता है तो उछलने दो  सच्चाई को बाहर तो आने दो,, इतना आसान नहीं  हर फूल को कीचड़ में खिल जाना,, सफ़र जब काँटों से भरा  ज़ख्म को भर तो जाने दो,, रुकावटें आएँगी बहुत  हज़ारों फूल कमल जैसे,, नाज़ुक फूल है कमल काँटों को दूर भगाने दो,, हर तरफ़ कीचड़ ही कीचड़  कमल को ख़िल जाने दो,, सफ़र जब काँटों से भरा  ज़ख्म को भर तो जाने दो,, माफ़ करना  गलती सबसे हो जाती है अनजाने में,, सज़ा देना बहुत आसान  कांटना बस की बात नहीं,, एक गलती  माफ़ करने का हक  हर इंसान को दे दो,, गुनाह ग़र छोटा मोटा हो  सज़ा को माफ़ हीं कर दो,, जिंदगी चुनौतियों से भरा  भूल चूक आम बात है,, उजाड़ना घर तो आसान  बनाने में साल गुज़र जातें,, गिने चुने हीं बच जाते  जो जीत कर वापस हैं आते,, फूल बन नहीं सकते  तो कांटा बनके मत चुभना,, सफ़र जब काँटों से भरा  ज़ख्म को भर तो जाने दो

उठना चाहता है वो मग़र

उठना चाहता है वो मग़र  बार बार गिर जाता,, हालात से मजबूर बेचारा  कौन है उसका सहारा,, बचपन में माँ का सहारा मिला  फिर भी बेचारा,, जवानी में बीबी का सहारा मिला  फिर भी बेचारा,, बुढ़ापे में अपने बच्चो का सहारा फिर भी बेचारा,, हज़ार बार गिरा मग़र  हारा नहीं कोई सहारा नहीं,, गुज़ारा नहीं आवारा शायद  जिंदगी को गंवारा नहीं,, सुधर जाता मग़र  किसीने सुधारा नहीं हत्यारा नहीं,, कोई उजाड़ जाता घर  बनाना चाहता बना पाता नहीं,, अनपढ़ होने की उसको  इतनी सज़ा मत दो,, हालात का मारा  एक गलती तो माफ़ कर दो,, घर तो बना नहीं सकते  तो उजाड़ते हो क्यूँ ,, छोटे छोटे गुनाहों के लिए  उसे ताड़ते हो क्यूँ 

उसको समझने चला

उसको समझने चला  जिसने पैदा किया,, सफ़र मुश्किल भरा  कुछ भी समझा नहीं,, वो मुझसे कहने लगी  मैं भी सुनने लगा,, उसने बोला वही  जो मैंने सुना हीं नहीं,, जब मैंने कहाँ  तू है मुझमें कहीं  की तू मुझमे नहीं,, तब उसने कहाँ  नहीं मैं नहीं  तू है मुझमे कहीं,, इतना दर्द सहा  इतने ताने सुने  तुझको पैदा किया,, पाल पोस के तुझे  समझने लायक किया  तू नालायक,, मुझे क्यूँ समझने चला  समझना मुझे इतना आसान नहीं,, जिस दिन से तू  समझने लगेगा  फिर मेरा यहाँ  काम नहीं,, लालची मैं नहीं  दानी भी नहीं  तोहफा उसको दिया,, जिसने शादी किया  मुझसे प्यार किया  इंतज़ार किया 

डर से सब डर जाते

डर से सब डर जाते एकता में सब लड़ जाते,, अफसोश वहीं करते  जो सच को छुपा नहीं पाते,, झूठ की बुनियाद में  सच कहाँ टिक पाता है,, झूठा बन जाता है  सच झूठ से पीछे रह जाता है,, आवाज़ दबाना आता उसे  सच को भी छुपायेगा,, सच किसका सहारा लेके  किसको सुनाने जायेगा,, जानवर जैसे झुंड बनाकर  कभी तो पकड़ा जायेगा,, कमज़ोर कर मज़बूर तुझे भी अपने जैसा बनायेगा,,   मज़दूर हो मजबूर हो  तो कभी भी बदल ना पायेगा,, राजा हो या रंक  या लगा हो कलंक  सबका नंबर आयेगा,, फैसला जब हनुमान  अपना प्रभु राम को सुनायेगा,, रावण बाहर आयेगा  मिर्त्युदण्ड पायेगा  सब बदल जायेगा,, झुकना है तो  भगवान के आगे झुक  इंसान तो इंसान है,, माँ बाप का शान है  देश का इनाम है  मजबूर है  गुलाम है 

बचपना को याद कर

बचपना को याद कर  जवानी में रोता,, अफ़सोस करता  काश अभी बच्चा होता,, चाहे सज़ा दे दिया होता  ख़ामख़्वाह माफ़ किया,, माँ ने जवानी बुढ़ापा  भले छीन लिया होता,, दिल से रोता नहीं  अपनों को खोता नहीं,, दर्द होता नहीं  जवानी में बूढ़ा होता नहीं,, अत्याचार ना होता  तो कोई लाचार ना होता,, भरस्टाचार ना होता  तो कोई बीमार ना होता,, चाहे सज़ा दे दिया होता  ख़ामख़्वाह माफ़ किया,, माँ ने जवानी बुढ़ापा  भले छीन लिया होता,, अदला बदला ना होता  तो शायद ख़तरा ना होता,, कोई अच्छा ना होता  तो कोई बुरा भी ना होता,, दिल से रोता नहीं  अपनों को खोता नहीं,, दर्द होता नहीं  जवानी में बूढ़ा होता नहीं 

जिंदगी जंग के जैसी

जिंदगी जंग के जैसी  मुश्किलें और बढ़ने लगी,, तूफ़ान के जैसे  हवा में उड़ने लगी,, बेजान सी ज़ुबान  अब थर्राने लगी,, सोचता हूँ  क्या करूँ  तूफ़ान के साथ  आगे बढ़ूँ,, ये तो ट्रेलर दोस्तों फिल्म अभी बाकि,, कर्ज में दबा  कितनों का उधार बाकि,, तन ढकूँ की मन  चेहरा और ये सितम  हार गया,, कायर तो नहीं  घर से फायर तो नहीं,, दुरी और बढ़ने लगी  नज़दीकियों से,, लड़ूँगा  आख़िरी साँस के साथ  चाहें मुश्किल बढ़े,, अदृश्य है  तो क्या मुखौटा और साथी,, हिम्मत के साथ चलूँ  तो संग में बारात,, अच्छा किया  फैसला लिया  सोच लिया  समझ लिया,, आगे बढ़ा  पीछे हटा  क्या किया  क्यूँ किया,, गलती मान लिया  किसको पहचान लिया,, जो भी हो  अच्छा हुआ  आगे भी होगा  कुछ तो अच्छा 

आवाज़ फिर से उठायेगा

किसी की महलों में  किसी की सड़को पे  गुज़र जायेगा,, वक्त हीं तो है  क्या लेके आया था  जो कुछ लेके जायेगा,, बंगला गाड़ी  नौकर चाकर  काम ना आयेगा  बदल जायेगा,, सब बदल जायेगा  बेचना चाहेगा  तो भी बिक नहीं पायेगा,, वक्त तो गुज़र जायेगा इतिहाँस बदल जायेगा  बदल जायेगा,, कानून बदल जायेगा  नेता अभिनेता रोजगार  बदल जायेगा,, आप भी बदल जायेगा  हाथ मिला ना पायेगा  बदल जायेगा,, कमल का फूल  खील तो पायेगा  खिलता हीं रह जायेगा,, वक्त के साथ बदलना  समय के साथ चलना हीं जिंदगी,, कल के भविष्य में  सच के साथ जीना हीं काम आयेगा,, भेदभाव के साथ  कब तक टिक पायेगा  कोई तो आएगा,, आवाज़ फिर से उठायेगा  गुनाहगारो को बदल जायेगा 

जिन्दा लाश हूँ

जिन्दा लाश हूँ  अभी आसानी से बिखर जाउँगा,, बिल्ली नहीं डर जाऊँगा  एकदिन नज़र आऊँगा,, थक जायेगा  मुझे झुकाते - झुकाते  वक्त के साथ  झुक जाऊंगा,, समय के साथ  फिर नज़र आऊँगा,, ज्ञानी नहीं  अज्ञानी है तू  जो बोयेगा वही खायेगा,, मौशम के साथ  हवा का रुख जैसे  बदल जाता है,, मैं भी बदल जाऊँगा  शेर के जैसा नज़र आऊँगा,, वक्त बदलता रहता है  शेर तो पिंजरा में रहता है,, हवा के झोंके जैसे  पिंजरा से बाहर मैं आऊँगा,, समय के साथ चल पाउँगा  फिर नज़र आऊँगा,, अकड़ तुझमे  तो मुझमें भी कम नहीं  आऊँगा  इंतज़ार कर  फिर से आऊँगा  पिंजरा लाऊँगा  मैं भी बदल जाऊँगा  शेर बन के नज़र आऊँगा,, अकड़ छोड़  मैं भी छोड़ जाऊँगा  सुधर जाऊँगा,, बदला नहीं  बदलाव के साथ  नज़र आऊँगा  बदल जाऊँगा  अकड़ नहीं  प्यार से  दोस्त बन जाऊँगा

न्याय की देवी

न्याय की देवी  न्याय करो जान की तुम रक्षा करो,, जान है तो जहान है  फ़िर जहान की तुम रक्षा करो,, अमीरों को तो न्याय  गरीबों को कहाँ मिलता न्याय,, चंद रुपयों पे सब बिक जाते  रुपया को खत्म करों,, गरीबी अमीरी भेदभाव में  नफ़रत की भरी है आग,, जान की क़ीमत रुपया  तो हो जायेगा सबकुछ राख,, जनशंख्या अल्पसंख्या से  आतंकी ख़तरा मंडरायेगा,, ये तरक्की किस काम की  सब ख़ाक में मिल जायेगा,, मौसम के साथ बदलते रहना हीं जीवन का आधार,, समय के साथ चलना हीं जिंदगी  बाकी सब बेकार  ऑनलाइन के ज़माने में  बिज़नेस भी बदल जायेगा  कुछ दिन सबकुछ अच्छा  फिर से ख़तरा मंडरायेगा

प्रवाशी कहलाया मज़दूर

उधार का पैसा  उधारी में चला गया  पहले हीं मज़बूर था  प्रवाशी कहलाया मज़दूर ... प्रेग्नेंट ३ महीने का बच्चे  और बेरोज़गार पति ने कहाँ,, सुनीता बेकार से अच्छा बेगार  कोई रोजगार करता हूँ,, पत्नी - क्या करेंगे आप इतने मोटे हैं  की खड़ा भी नहीं हो सकते,, पति -शादी किया हूँ मेरा फ़र्ज़ हैं  कुछ भी करके पेट भरूंगा,, पत्नी - ३ महीने का किराया बाकि है  और बिज़नेस के लिए पैसा,, पति - तुम ही कुछ करो  मैंने सारे रिस्तेदारो से उधार ले चूका हूँ,, पत्नी - अच्छा माँ तो नहीं दे पायेंगी  ब्याज पे कहती हूँ लेने के लिए,, पति - मरता क्या नहीं करता  ब्याज ही सही २५ हज़ार ठीक रहेगा  चाय पकोड़ी का दुकान करूँगा  कुछ महीने में पैसा लौटा देंगे,, पत्नी - ठीक है , बात करती है माँ से माँ कोसिस करती है , पैसा मिल जाता है  माँ बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवा देती है,, पति पत्नी दोनों घर से रवाना होते हैं  काफी कोसिस के बाद  एक कपडा मार्किट में दुकान मिल जाता है  बिना किराया  दोनों बहुत खुश होते है  फिर दुकान का सारा सामान खरीद  दुकान चालू करते हैं  दुकान गली में होने से  ग्राहक नहीं आता  लेकिन सलाहकार के कहने पे  चाय केतली में

वक्त वक्त की बात करें

वक्त वक्त की बात करें  तो हाल फ़िलहाल ये कैसा,, डॉक्टर सीता राम तो  कोरोना बना रावण के जैसा,, ऎशो आराम की जिंदगी में  चैन कहाँ सुकून कहाँ  जंगल अच्छा लगने लगे  वैसे हीं जानवर के जैसा,, गीता में उपदेश के जैसा  मोह माया जाल हैं वैसा,, राम की निति को अपना  ये जंग जीत जायेंगे हम,, कृष्ण के जैसी लीला कर  खुदको बचा पायेंगे हम,, पांडव बनके युद्ध करेंग  कौरवो को हरायेंगे हम,, दो कदम पीछे हट  चार कदम आगे बढ़ायेंगे हम,, सोंच समझ का फैसला हैं  जिंदगी का है सवाल,, वक्त के साथ बदल जाना भी  गिरगिट का है चाल  समय के साथ बदलना सीखो  वक्त पे करो काम  सावधानी हटी दुर्घटना घटी  हो जाओगे बदनाम 

ज़ेवर का तेवर अच्छा हैं

ज़ेवर का तेवर अच्छा हैं  लुटाया नहीं करते  चंंद कागज़ के नोटों के लिए  बहाया नहीं करते,, माता लक्ष्मी कागज़ की होती  तो सोना क्यूँ पहनती,, घर के देवी के जैसी देवी को  दाव पे लगाया नहीं करते,, भूखे पेट को रोटी मिले  बंगला गाड़ी दिखावा है,, ज़ेवर का तेवर अच्छा है  बाकी सब बहकावा है,, सब भगवान के वंसज है  पुर्वजो की पूजा करो,, प्रभु के धन की रक्षा करो  उनकी हीं पूजा करो,, कृष्ण बनो सुदामा बनो  चाहे बनो लक्षमण राम,, भोले बाबा का रूप बनके  करो विश्व कल्यान,, ज़ेवर का तेवर अच्छा हैं  लुटाया नहीं करते,, चंंद कागज़ के नोटों के लिए  बहाया नहीं करते,, सच की राह चुनो  महामारी भी टल जायेगा,, घबराने से कुछ नहीं  तिनका तिनका बिक जायेगा 

चोंच से चोंच मिलाने दो

चोंच से चोंच मिलाने दो  उसे भी जाने दो,, कबूत्तर नहीं  उड़ के चला जायेगा  पाबंदिया हटाने को  नया बिचार आने दो,, रेगिस्तान की गर्मी  पंखा तो लाने दो  जाने दो  प्यास को बुझाने दो  चैन से सो जाने दो  उधारी की जिंदगी  उधार में जाने दो  आने दो  पैसा ब्याज मुक्त स्किम के साथ,, पाबंदिया हटाने को  बिचार में सुधार लाने दो,, मिनिमम बैलेंस अकाउंट में  कैश आने दो  ब्याज लेने को साल गुज़र जाने दो  उधारी की जिंदगी उधार में जाने दो भूख मिटाने दो  शौक हटाने दो  भरस्टाचार घटाने दो,, पापियों के पाप मिटाने को  नया बिचार को लाने दो  संबिधान में बदलाव लाने को  सबकी राय  ऑनलाइन वोटिंग सिस्टम लाने दो  बदलाव आने दो  जनशंख्या अल्पसंख्या में जाने को हैं  रोको या जाने दो  किराया माफ़ कर  किरायेदार को घर जाने दो

पहचान की जरुरत

पहचान की जरुरत  जुर्रत नहीं मदद की पुकार है,, नाम तो कुत्ते का भी होता है  कर्म ही मददगार है,, चापलूसी एक हिस्सा  बन कर रह जाता  सच्चाई एक किस्सा बन कर रह जाता,, बच्चा हीं तो है  माफ़ी के लायक  बाकि तो  हिस्सा बन कर  रह जाता,, गलियां तो सब देते  मगर गलियां  कोई नहीं बताता,, लीला समझना आसां नहीं  महादेव का प्रभुलीला है,, पूजा तो सभी करते मग़र  मंशा अलग अलग होती है,, पाप का घड़ा  पुण्य का घड़ा  हिस्सा है  जीवन का  कोई राम बनके आता  तो कोई रावण

अकड़ कर वो चला जाता

अकड़ कर वो चला जाता  कहता डरता मैं नहीं,, लाखो मिल का शफर  और कोई साथी भी नहीं,, कहता मौत से क्या डरना  मौत फितरत में नहीं,, तू जो नहीं तो मैं नहीं  और कोई साथी भी नही,, और कोई साथी की जरुरत  क्या मैं काफी नहीं,, अकड़ कर क्यूँ चला जाता  देर से घर क्यूँ आता,, और कोई साथी तो नहीं  जो मुझे भूल तू जाता,, घोड़ा बेच कर सोना  लहंगा महंगा और सोना,, जिंदगी जीना आसां नहीं  मुश्किल घर में होना,, क्यूँ मजदुर तू मजबूर  कोई इज़्ज़त नहीं करता,, मेहनत की रोटी खता  खिलता चोरी नहीं करता,, ग़रीबी और मज़बूरी  और मज़दूरी उफ़ ये दुरी,, अकड़ता नहीं है मज़बूरी  बस तू हीं तो ये दुरी,, पढता लिखता क्यूँ नहीं  अनपढ़ अच्छा नहीं,, पेट भरना मुश्किल  पढ़ना लिखना आसां नहीं 

कौआ काओं काओं काओं

कौआ काओं काओं काओं  बिल्ली म्याऊँ म्याऊँ म्याऊँ मुर्गा कुकड़ू कू  कुत्ता भउँ भउँ भउँ,, कैसे सबको भगाऊँ  मम्मा मान जाओ  घुमा लाओ  बोर हो रहा हूँ  घुम आऊँ,, बाहर शेर खड़ा  कैसे ले जाऊँ  बोले  खाऊँ खाऊँ खाऊँ,, लल्ला मैं तेरा गल्ला  तेरी पूंजी पथारी  ले चल मुझे करनी है  ऊँट कि सवारी,, छुट्टी पड़ी स्कुल की  घुमाने ले चलो  मम्मा मान जाओ  पापा को ले चलो,, बब्बर कहीं गब्बर  कहीं शेर खड़ा है  घर से मत निकल  बाहर धूप बड़ा है,, जिद्दी है बड़ा तू  जिद्द कम किया कर  लल्ला मेरे गल्ला  बात मान लिया कर 

ऐ वतन तिरंगा का शान रहे तू

है आन बान शान  पहचान तुझीसे  जहान है तो  जान पहचान तुझीसे,, ऐ वतन  तिरंगा का शान रहे तू  जान ये कुर्बान  मेरा प्राण रहे तू,, आख़िरी हो स्वाँस मेरा  मिट्टी तेरा हों  खून हो मेरा मग़र  झंडा तिरंगा तेरा हों,, ऐ वतन  तिरंगा का शान रहे तू  जान ये कुर्बान  मेरा प्राण रहे तू,, तिरंगा झंडा मेरा हो  चाहें खून मेरा हो  माँ बाप मेरे हो  बहन भाई मेरा हो  धरती मेरा हो  अम्बर भी मेरा हो,, यार मेरा हो  और प्यार मेरा हो,, ऐ वतन तिरंगा का शान रहे तू  जान ये कुर्बान मेरा प्राण रहे तू 

मर्यादा पुरुषोत्तम राम

चरणों में तेरे चारो धाम  नारी प्रतिष्ठा में ऊंचा नाम,, त्रेतायुग में अयोध्या धाम  भक्त जपें बस तेरा नाम,,   अज्ञानी को देते ज्ञान  जय सिया राम जय हनुमान,, मर्यादा पुरुषोत्तम राम  जय सीताराम जय हनुमान,, मुख में है राम  लक्षमण का नाम  जय हनुमान जय दशरथ राम  कौसल्या राम जय सीताराम,, मर्यादा पुरुषोत्तम राम  चरणों में तेरे चारो धाम  बन जाते बिगड़े काम  पतितपावन सीता राम 

कलयुग में हाहाकार

कलयुग में हाहाकार  भक्त करते तेरी पुकार  जय सियाराम जय सीताराम  राम राम राम  जय हनुमान जय बजरंगबली  राम राम राम,, दुष्टों का नाश करो  जय हनुमान जय सीताराम  भक्तो की रक्षा करो  जय हनुमान जय सीताराम  अज्ञानी को ज्ञान दो  जय हनुमान जय सीताराम  साँच में आँच नहीं  जय हनुमान जय सीताराम  नारी को शक्ति दो  जय हनुमान जय सीताराम  अँधे को आँख दो  जय हनुमान जय सीताराम  एक बार दर्शन दो  जय हनुमान जय सीताराम  जय सियाराम  जय सीताराम  राम राम राम राम  जय हनुमान  जय बजरंगबली  राम राम राम राम

बस अब बस करो

बस अब बस करो  चालू क्युँ किया,, ख़तरा जब टला नहीं  राहत क्युँ दिया,, उनको माफ किया  सजा क्युँ दिया,, खुद पे यकीन ना था  फैसला क्युँ लिया,, उसको क्यूँ बदला  ख़ुदको बदल लेते,, सच्चाई के राह का  कोई रास्ता चुन लेते,, तकलीफ़ ना होती  तो शायद बिगड़ता ही नहीं,, सब बिगड़ हीं जाते  तो कोई सुधरता ही नहीं,, सब तो बेच दिया  अब क्या बेचोगे  बहन या बेटी  या पत्नी या फिर माँ,, कुछ भी तो रहा ना  बस अब बस करो  जब कुछ दे नहीं सकते  तो लुटा मत करो

लालच बुरी बला

लालच बुरी बला  देश बिदेश हाल ये कैसा,, कवी का नाम ना होता  कोई ग़ुलाम ना होता,, दर्द की बांध के गठरी   पीठ पे लाद के चला हवा खाता आँशु पिता   पसीने से नहाता चला,, मंजिल दूर था मज़बूर   फूटी कौड़ी ना होने से  चप्पल के घिस जाने से  धुप की गर्मी होने से,, उसे कोई रोका ना होता  मंजिल पास में होता  वो अपने घर में सोता   बच्चो के साथ में होता 

अनकहीं बातें तेरी

(M) अनकहीं बातें तेरी  कांटा बन चुभ जाऊँगा  पल की खुशियाँ देके आँशु बन तड़पाउँगा,, (F) शब्दबाण कड़वा तेरा  नीम के पत्तो जैसा  मैं गर चली जाऊँ  तू फिर जैसे का तैसा,, (M) लाखों तेरे जैसे तू  किस खेत की मूली  अशली बन्दुक हूँ  तू तो नकली गोली,, (F) मुझे तू माफ़ करना  मैं सुधर जाऊँगी  गलती माना मैंने  मैं तो डर जाऊँगी,, (M) आना ना आना  चले जाना चले जाना  जाना ऐसे ना जाना  यादें साथ ले जाना,, (F) ताका झांकी का नज़राना  ना लाना ना आना  आसान नहीं मुस्किल  तनहा मन समझाना,, (M) कल्ला बैठ के रोना  कल्ला नींद से सोना  जाना ऐसे ना जाना  यादें साथ ले जाना

शनिदेव शनिदेव भक्तजन हितकारी

शनिदेव शनिदेव  जय जय शनिदेवा  मोदक पान सुपारी से  भक्त करे सेवा,, शनिदेव शनिदेव  भक्तजन हितकारी  शनिवार पूजा करूँ  विश्वनाथ भी पुजारी,, लोहा तिल तेल महिषी  उरद अति प्यारी सूरज पुत्र शनिदेव  छाया महतारी,, शनिदेव शनिदेव  भक्तजन हितकारी  शनिवार पूजा करूँ  विश्वनाथ भी पुजारी,, कर्मो का न्याय करें  यम यमुना दुलारी  साढेशाती शनिदेव  नौ ग्रहों में बलकारी,, शनिदेव शनिदेव  भक्तजन हितकारी  शनिवार पूजा करूँ  विश्वनाथ भी पुजारी,, कागा असवारी करे  शनिदेव बलकारी  देव दनुज ऋषि मुनि  धरे ध्यान तुम्हारी,, शनिदेव शनिदेव  भक्तजन हितकारी  शनिवार पूजा करूँ  विश्वनाथ भी पुजारी,, शनिवार पूजा करूँ  विश्वनाथ भी पुजारी  शनिदेव शनिदेव  भक्तजन हितकारी  शनिवार पूजा करूँ  विश्वनाथ भी पुजारी  शनिदेव शनिदेव  भक्तजन हितकारी

हँस ले बेटा हँस लेएक दिन तू रोयेगा

हँस ले बेटा हँस ले एक दिन तू रोयेगा,, आज उसने खोया है  कल तू भी खोयेगा,, कोई गुरुर में मग़रूर  कोई नशे में चूर,, कोई बेबस लाचारी में  अपनों से दूर,, खूब खेल बेटा  लॉस प्रॉफिट का खेल,, प्रॉफ़िट में गुलछर्रे  फिर लॉस में क्यूँ रेल,, घर को उजाड़ने वाले  घर कैसे बसायेगा,, तेरा भी उजड़ जायेगा  तब समझ आयेगा,, हँसने वाले बेटा  जब तू  पापा बन जायेगा,, पापा-पापा  चिल्लायेगा  बेटा रहना चाहेगा

बुलाती तो है मग़र केसे जाऊँ

बुलाती तो है  मग़र केसे जाऊँ,, बूढ़ा नहीं  जो बर्दास्त कर जाऊँ,, वैलिडिटी ख़त्म  रिचार्ज तो कराऊँ,, हनुमान तो नहीं  जो लंका कूद जाऊँ,, ओल्ड इज़ गोल्ड  नया कहाँ से लाऊँ,, आत्मनिर्भर नहीं  कैसे उसके पास जाऊँ,, झूठ बोलता नहीं  जो लम्बी-लम्बी फेकूँ,, नज़ारे कम नहीं  फिर भी उसीको देखुँ

कोविड19 की महामारी यारो दुनियाँ सारी है बेचारी

कोविड19 की महामारी  यारो दुनियाँ सारी है बेचारी ,, अर्थब्यवस्था को पटरी पे लाने की  सरकार की तैयारी,, बेरोजगारों को रोजगार मिले  तो ख़त्म हो ये महामारी ,, भुखमरी से बचाने की  सरकार करें  और भी तैयारी ,, एक कदम सच्चाई का  एक कदम भलाई का  भुला के सारे ग़म   एक कदम अच्छाई का,, मज़दूर भी मज़बूर   दुखियाड़े भी बेचारों   और लाचारों को बीमारों को मासूमों को  साथ दो मेरे यारो तो मुझें यकीन हैं  रुक सकते है उनके गुनाहों कि तरफ बढ़ते कदम,, जाती प्रथा भेद भाव पे राजनीती   ख़त्म करो मेरे यारो  अँधा कानून हो सकता है  तुम मत बनो दिलदारों ,, वक्त और हालत बदलना आसान नहीं  देश के वीर जवानों   इतिहास तो इतिहास है  सीखो जानो देश को बदलो यारों,, गरीबी से भुखमरी की तरफ़ बढ़ते कदम  रोको दिलदारों   दो वक़्त की रोटी से ख़ुशी   लालच छोड़ो अमीर यारों,, पढ़े - लिखे और अनपढ़ो के  योगदान को समझों यारो,, अमीरी-गरीबी में इंसानो को  तौलना छोड़ो दिलदारों ,, सोंच बदलना ज़रूरी  देश बदलना आसान   भगवन यहाँ कोई नहीं  सभी यहाँ इंसान ,, नारा लगाओ देशवासियो  मेरा भारत महान ...