चोरी करने वालो को पुलिस पकड़ लेती

चोरी करने वालो को पुलिस पकड़ लेती है,चाहे पेट भरने के 
लिए खाना हीं क्यूँ ना चुराया हो,गर्व की बात है हमारे रक्षक 
होते पुलिस वाले,मुज़रिम को थाने में ले जाते,रिमांड लेने के 
बाद रिकवरी फ़िर उन्हें जेल में पहुँचाते, सबुत इकट्ठा कर के
रिपोर्ट तैयार करते जज के फैसले का इंतज़ार कर सज़ा भी करवाते या सबूत के आभाव में बरी.

बहुत लम्बी चौड़ी कहानी होती मुज़रिमों की,क्यूँकि मुज़रिम 
तो अपने बाप का भी नहीं होता, पुलिस वाले अच्छे होते जो 
मुज़रिम को जेल में पहुँचाते उससे सज़ा कटवाते,पुलिस को 
मुज़रिम को पकड़ने के बदले तनख्वाह,सरकार और पुलिस
का होना अति आवश्यक है देश को चलाने के लिए, सरकार 
को हम वोट देते और जिताते रहते.

दिन पर दीन घोटाले होते तो ऍफ़ आई आर भी होते हीं रहते   
देश छोड़कर भाग जाते मुज़रिम तो कभी पकड़े भी जाते तो  किसी का एनकाउंटर होता तो किसी का गुनाह साबित नहीं 
हो पाता, ऐसा क्यूँ जब पुलिस का काम है पकड़ना तो कोई 
गुनाह करके कैसे पुलिस को गुमराह कर जाता, मुज़रिम को 
पकड़ना क्या इतना मुश्किल है. 
 
सरकार से गलतियाँ नहीं होती, क्या पुलिस काम ईमानदारी 
से करते हैं, क्या जज सभी मुज़रिमों को सज़ा दे पाता, नहीं बिलकुल नहीं मुज़रिम शातिर होते हैं, पुलिस पकड़ने जाती 
मग़र ज्यादातर को पकड़ नहीं पाती, रिपोर्ट में दिखाये जाते 
की यही मुज़रिम है क्यूँकि पुलिस को रिपोर्ट तैयार करने के 
बाद तीन महीने के भीतर जज के पास देना होता है, सोंचने 
पे मज़बूर हो जाता जज की कौन सही कौन ग़लत.

हर तरफ़ भर्ष्टाचार अत्याचार है,जज अपना फैसला सुना के  
मुज़रिम को जेल भेज देता या उसे छोड़ देते ऐसा क्यूँ होता  
जो बरी हो जाते वो जेल में जाते क्यूँ हैं,पुलिस सबूत इकठा  
नहीं कर पाती तो पुलिस को सज़ा क्यूँ नहीं होता, ईमानदार 
होते पुलिस वाले तो कहाँ गया ईमान, ग़लत है ये तो अन्याय 
है न्याय नहीं,सज़ा देना है तो पहले साबित करो.

प्रशासन पहले भ्र्ष्टाचार अत्याचार बलात्कार करने वालो को 
क्यूँ नहीं पकड़ती,लूट हत्या अपहरण में लीन को तो पकड़ने जाती,चोरो को पकड़ने जाती, सरकारी कर्मचारी भर्ष्टाचार में 
लीन हैं जो उसे पुलिस क्यूँ नहीं पकड़ पाती,खिलाती उनका इलाज़ करवाती क्यूँ वो बारात में आये हैं, मुज़रिम को मुफ़्त  
में खाना क्यूँ खिलाती काम क्यूँ नहीं करवाती.

जेल में कारखाना खोल देना चाहिये, मुफ्त में खाना खिलाने 
से अच्छा है कोई काम करवाना,भर्ष्टाचार में लीन पुलिस को नौकरी से निकाल देना चाहिये,न्यायपालिका अगर फ़ोन को  
ट्रेस करे, कितने सारे जज है भर्ष्टाचार करते नज़र आयेंगे तो   भ्र्ष्टाचार को रोकने के लिये सरकारी कर्मचारियों का, पुलिस वकील,जज, मुज़रिम,नेता,मंत्री सभी का फ़ोन नंबर ट्रेस कर  
भर्ष्टाचार अत्याचार खत्म किया जा सकता है.

भ्र्ष्टाचार से अत्याचार से मुक्त भारत का निर्माण कर समाज  
को सुधारा जा सकता है,आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित किया  
जा सकता है, किसी अपराधी को सज़ा देना चाहिए, लेकिन 
पहले उसके गुनाहों को साबित करने के बाद, ऐसा हो पाता 
तो कम से कम महामारी ख़त्म होने तक मुज़रिमों को छोड़ा  
जाता, कुछ शर्तो के साथ जैसा की फ़िर से गुनाह करने पर  
सज़ा दोगुना कर दिया जायेगा.

समाज सुधारने का मौका बार बार नहीं मिलता और शायद गुनेहगार को भी सुधारा जा सकता है, भ्र्ष्टाचार करने वालो 
को पकड़ने के लिए गुनेहगार से मदद लेके भर्ष्टाचार बढ़ावा 
देने वाले सरकारी कर्मचारी, पुलिस वकील आदि को पकड़
भ्र्ष्टाचार अत्याचार को जड़ से खत्म किया जा सकता है तो 
जल्द से जल्द विचार कर निर्णय लेना चाहिए.

Thank you
 
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